बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन और राजग का भविष्य ऐसे युवा मतदाताओं पर भी निर्भर करेगा जो पहली बार मताधिकार का उपयोग करेंगे।
इस मतदाता वर्ग की खास बात यह है कि इन्हें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ही रास नहीं आते और एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी सहित तमाम बड़बोले नेताओं की बयानबाजी भी इन्हें सख्त नापसंद है।
चुनावी विश्लेषण में समस्या यह है कि इस वर्ग में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समान रूप से असर है।
पीएम मोदी को एक और मौका देने के पक्षधर युवा उन्हें जहां और समय देने के पक्ष में हैं, वहीं नीतीश समर्थक युवा मतदाता बिहार में बदलाव की जरूरत महसूस नहीं करते।
बिहार में ऐसे 26 लाख मतदाता हैं। विधानसभा के हिसाब से देखें तो सूबे की हर सीट पर ऐसे नए करीब 10,700 मतदाता हैं। बीते विधानसभा चुनाव में करीब 80 फीसदी सीटों पर जीत हार का अंतर 10 हजार से भी कम था। ऐसे में इन युवाओं के वोट की अहमियत पहचानी जा सकती है।