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Gopal Khemka Patna : बिहार के डीजीपी विनय कुमार का आंकड़ा सच नहीं था? गोपाल खेमका की हत्या के बाद खुली हकीकत

Sat, 05 Jul 2025 08:28 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar Police : 04 जुलाई की देर रात पटना में प्रसिद्ध उद्योगपति गोपाल खेमका की हत्या कर दी गई। इस हत्या ने बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के उस दावे को झुठला दिया, जो सात दिन पहले उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने किया था।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ डीजीपी विनय कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अबतक 'अमर उजाला' आपको पटना के प्रसिद्ध उद्योगपति गोपाल खेमका की हत्या से जुड़ी कई खबरें पढ़ा चुका है। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को तलब किया, पुलिस ने एसआईटी गठन कर लिया, विपक्ष महा-जंगलराज कह रहा, बेऊर जेल में छापा... यह सब कुछ। अब यह जान लें कि बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने सात दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने एक बड़ा दावा किया था, जो गोपाल खेमका हत्याकांड में एक सफेद झूठ साबित हुआ। चिंता यह भी कि 21 हजार से ज्यादा नव-नियुक्त सिपाहियों के सामने कही गई डीजीपी की बातें झूठी निकली। 

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क्या कहा था डीजीपी ने और क्या दिखा इस घटना में
डीजीपी विनय कुमार ने नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में पटना के सबसे बड़े सभागार में दावा किया था कि बिहार पुलिस का डायल 112 आज औसतन 15 मिनट में रिस्पांस देता है। उन्होंने कहा था कि शुरुआत में यह 5 घंटा तक समय लेता था। गोपाल खेमका की हत्या शुक्रवार 04 जुलाई की करीब 23:30 (रात साढ़े 11 बजे) बजे हुई और पुलिस शनिवार 05 जुलाई को 01:30 के बजे के करीब पहुंची। अगर आप पटना में नहीं रहते हैं या इसके भूगोल से वाकिफ नहीं तो यह जान लीजिए कि गांधी मैदान में खेलने वाले कुछ लड़के लगभग इसी जगह से क्रिकेट में छक्का मारते हैं तो गेंद गांधी मैदान थाने तक पहुंच जाती है। बगल में रिजर्व बैंक है। घटनास्थल से जितनी दूर गांधी मैदान थाना है, उसकी दोगुनी दूरी पर पटना के जिलाधिकारी का आवास है। अब, अगर डायल 112 का पटना में इस जगह पर रिस्पांस टाइम यह है तो राज्य के बाकी हिस्सों को लेकर दावा किया जाना कितना सही होगा? 

रिस्पांस टाइम सही होता तो अपराधी हिम्मत नहीं करता
पटना पुलिस की गश्ती और डायल 112 की सक्रियता इस मामले में खुलकर सामने आ गई है। राजधानी में पुलिस पटना जिले से बाहर की गाड़ियों, बगैर हेलमेट के बाइक सवारों, बगैर सीट बेल्ट के कार सवारों, जेब्रा कॉसिंग पार करने वाली गाड़ियों और 40 की जगह 42 की स्पीड में भी गुजरने पर आम शहरी के वाहन को पकड़कर वसूली करने में जितनी ताकत और सूझबूझ झोंकती है, वह किसी से छिपा नहीं है। पुलिस सारा ध्यान या तो शराब खोजने में लगाती है या आम वाहन सवारों को परेशान करने में। वहीं, गोपाल खेमका हत्याकांड में सामने आया कि अगर रात्रि गश्ती होती तो गांधी मैदान के चक्कर लगाती गाड़ी भी पांच मिनट में एक बार जरूर इस जगह पर रुक जाती। परिजनों और उसके बाद पहुंचे मीडियाकर्मियों और सांसद पप्पू यादव... सभी ने पुलिस को हर तरह से कॉल किया। हर नंबर पर डायल किया। लेकिन, रिस्पांस का समय करीब दो घंटे रहा। और तो और, पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा का तो मोबाइल बाकायदा बंद था, रिस्पांस तो दूर की बात है।

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