बिहार में अब जिनके घर शौचालय नहीं है, वह भी पंचायत का चुनाव लड़ सकेंगे। आखिरकार नीतीश सरकार ने अपने एतिहासिक फैसले को बदल डाला। राज्य कैबिनेट के इस फैसले से मुखिया समेत अन्य पदों के प्रत्याशियों को राहत मिलेगी।
मंगलवार को राज्य कैबिनेट की हुई बैठक में पूर्व के फैसले को वापस लेते हुए घर में शौचालय रहने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया। बिहार में ऐसे परिवारों की संख्या डेढ़ करोड़ से अधिक है, जिनके पास शौचालय नहीं हैं।
नीतीश सरकार ने पहले यह फैसला लिया था कि पंचायत के किसी भी पद के चुनाव लड़ने के लिए घर में शौचालय जरूरी होगा, लेकिन भाजपा समेत कई राजनीतिक दलों ने सरकार के इस फैसले को गरीब विरोधी करार दिया और इसे वापस लेने की मांग की थी।