अब बिहार के अस्पतालों में इलाज करानेवाले मरीजों को जांच व इलाज के लिये बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रखंडों के अस्पतालों में ही मरीजों को पटना और बेंगलुरु के डॉक्टरों से चिकित्सकीय सलाह मिल सकेगी। राज्य में नेशनल रूरल टेलीमेडिसिन आयुष नेटवर्क (नारटन) के नाम से यह सुविधा 10-12 मार्च से प्रारंभ होगी।
पहले चरण में राज्य के 100 अस्पतालों में टेलीमेडिसिन सेवा की शुरूआत हो जायेगी। करीब 250 अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। यह सेवा उपलब्ध कराने के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने कर्नाटक सरकार की कंपनी कियोनिक्स से समझौता किया है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 27 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव सह राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार केे आयुष विभाग ने इसके लिये राशि का प्रबंध किया है। यह सेवा 212 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व 38 जिला अस्पतालों में मिलेगी। इसके अलावा एक यूनिट राज्य स्तर पर पटना में स्थापित होगी।
टेलीमेडिसिन की इस सुविधा के लिये मरीजों को शुल्क देना होगा। हालांकि, यह कोशिश की जा रही है की बीपीएल परिवारों को इसका लाभ मुफ्त दिया जाये। इस पर होनेवाले खर्चे का भुगतान राज्य सरकार करेगी। साथ ही चिकित्सकीय सलाह के बाद राज्य सरकार द्वारा दवा मुफ्त उपलब्ध कराई जायेगी।