आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से उपलब्ध कराई गई मदद मामले के तूल पकड़ने से भाजपा सकते में है। मोदी सरकार के एक साल पूरा करने के तत्काल बाद और बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उपजे इस विवाद से पार पाने के लिए पार्टी अब बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में जुटी है।
पार्टी की चिंता का कारण विपक्ष द्वारा हमले के दायरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेने और एक साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के मोर्चे पर पाक साफ दामन वाली सरकार का दामन दागदार होने के सियासी खतरे को लेकर है। दूसरी ओर विपक्ष के हमलों के बीच पार्टी में मची खींचतान से खफा संघ का सुषमा के समर्थन में खड़ा रहना सीधा हस्तक्षेप का संकेत देता है।
संघ एक साल के दौरान ‘आंतरिक साजिश’ से जुड़ी तीसरी घटना सामने आने से भी बेहद खफा है। माना जा रहा है कि संघ की ओर से नाराजगी जताने के बाद ही मंगलवार को विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देने के लिए पहली बार वित्त मंत्री अरुण जेटली को मैदान में उतारा गया। इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की वित्त मंत्री की उपस्थिति में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक हुई।