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Bihar: 'PM मोदी के सामने नीतीश कुमार का कोई स्टैंड नहीं', सुशील मोदी बोले- मंडल और कमंडल दोनों भाजपा के साथ

Sun, 14 Aug 2022 07:34 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

सुशील मोदी ने कहा कि नीतीश का प्रधानमंत्री मोदी के सामने कोई स्टैंड नहीं है। उनके पास बिहार के बाहर कुछ भी नहीं है और राज्य के नेता के रूप में उनका प्रभाव भी कम हो रहा है। उनकी लोकप्रियता और जनाधार दोनों में गिरावट आई है।
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नीतीश कुमार-सुशील कुमार मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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बिहार में बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बाद वहां बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने रविवार को नीतीश कुमार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जद (यू) सुप्रीमो नीतीश कुमार का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कोई स्टैंड नहीं है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने रविवार को कहा कि मंडल और कमंडल दोनों भाजपा के साथ हैं। 

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नीतीश का घट रहा प्रभाव
विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार के उभरने की संभावना को खारिज करते हुए सुशील मोदी ने कहा कि उनसे पहले ही टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी और टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव जैसे बड़े नेता दावेदार बनने के लिए रेस में हैं। नीतीश कुमार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जदयू नेता का प्रभाव उनके गृह राज्य बिहार में भी घट रहा है। 

नीतीश कुमार का पीएम मोदी के सामने कोई स्टैंड नहीं
सुशील मोदी ने कहा कि नीतीश का प्रधानमंत्री मोदी के सामने कोई स्टैंड नहीं है। उनके पास बिहार के बाहर कुछ भी नहीं है और राज्य के नेता के रूप में उनका प्रभाव भी कम हो रहा है। उनकी लोकप्रियता और जनाधार दोनों में गिरावट आई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भाजपा को अब समाज के सभी वर्गों का समर्थन प्राप्त है। आज की भाजपा के साथ मंडल और कमंडल दोनों है। मंडल और कमंडल दोनों पार्टी के साथ हैं और प्रधानमंत्री मोदी देश में ओबीसी की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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लालू यादव पर भी लगाए आरोप
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजद प्रमुख लालू यादव की सत्ता और धन की लालसा एनडीए सरकार के पतन के लिए जिम्मेदार थी। सुशील मोदी ने दावा किया था कि राज्य की राजनीति में उनकी लोकप्रियता कम होने के साथ नीतीश एक राष्ट्रीय भूमिका निभाना चाहते थे जो भाजपा के साथ संभव नहीं है। इसलिए वह गठबंधन तोड़ने के लिए काफी लंबे समय से बहाना खोज रहे थे। 

क्या है मंडल और कमंडल
गौरतलब है कि 1990 में मंडल आयोग के विरोध के बाद मंडल शब्द अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जातियों को शामिल करने वाली राजनीति के लिए गढ़ा गया था। वहीं, 'कमंडल' भाजपा की हिंदुत्व की राजनीति का एक रूपक है। 

इस सप्ताह की शुरुआत में जब नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़ कर राजद के साथ आ गए थे तब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर काफी चर्चा थी कि भाजपा एक बार फिर से 'मंडल बनाम कमंडल' की राजनीति की चुनौती का सामना कैसे करेगी। 

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