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सुशील मोदी ने नीतीश से मिलने से किया इनकार

Sun, 16 Jun 2013 12:59 AM IST
पटना/ब्यूरो
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बिहार में भाजपा और जद-यू गठबंधन के टूट के करीब पहुंचने के बीच शनिवार को प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी तथा प्रदेश राजग के संयोजक नंदकिशोर यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने से इंकार कर दिया।
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नीतीश ने इन दोनों नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया था। बिहार के उप मुख्यमंत्री ने अपनी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल बंद भी कर दिया है। उन्होंने अपने निजी वाहन का उपयोग शुरू कर दिया है।

जद(यू)-भाजपा गठबंधन में शनिवार को भी रस्साकसी जारी रही।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य भाजपा के वरिष्ठ नेता और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी तथा कैबिनेट मंत्री नंदकुमार यादव को बातचीत के लिए बुलाया था, लेकिन इन दोनों ने यह कहकर मिलने से इंकार कर दिया कि नीतीश को जो भी कहना था वह भाजपा के केंद्रीय नेताओं से कह चुके हैं। इसलिए अब उनसे मिलने का कोई औचित्य नहीं है।
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मीडिया से बातचीत में नंदकुमार यादव ने कहा कि हम राज्य के नेता हैं और हमें प्रधानमंत्री पद के बारे में बात करने का अधिकार नहीं है। इस पर सिर्फ हमारे राष्ट्रीय नेता ही बात कर सकते हैं।

यादव ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, नितिन गडकरी समेत भाजपा के कई राष्ट्रीय नेता उनसे और शरद यादव से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी समेत अन्य राजनीतिक मुद्दों पर बात करते रहे हैं।

वैसे भी यह मुद्दा हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसलिए इस पर विचार के लिए मिलने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

यादव का यह बयान मीडिया में आई उन खबरों के बाद आया है, जिसमें नीतीश कुमार के हवाले से कहा गया है कि भाजपा को सार्वजनिक तौर पर यह घोषणा करनी चाहिए कि 2014 के चुनावों में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं होंगे।

इस बीच, जद-यू सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार लगातार अपने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। देर शाम जद-यू अध्यक्ष शरद यादव और प्रधान महासचिव केसी त्यागी भी पटना पहुंच गए।

रविवार को पार्टी नेताओं और विधायकों की बैठक में गठबंधन के मुद्दे पर निर्णायक चर्चा के बाद फैसले का ऐलान होगा। जद-यू प्रवक्ता शिवानंद तिवारी का कहना है कि अब कुछ नहीं बचा है।

दोस्त हुए बेगाने
सियासत किस तरह पुरानी दोस्ती में दरार डाल देती है, इसका ताजा नमूना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी हैं।

जेपी आंदोलन के दौर से नीतीश और सुशील मोदी की दोस्ती लगातार चलती रही और पिछले डेढ़ दशक में इतनी मजबूत हुई कि बिहार भाजपा के कई नेता इससे बेहद असहज होते रहे हैं।
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जद(यू) भाजपा गठबंधन की सफलता की नींव भी यही दोस्ती थी, लेकिन अब नीतीश के बुलावे पर सुशील मोदी उनसे मिलने भी नहीं जा रहे हैं।
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