बिहार में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकलने से पहले तक बीएड करने वाले भी अब योग्य होंगे।
पटना हाईकोर्ट ने सोमवार को इस संबंध में फैसला सुनाते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पत्र को निरस्त कर दिया।
उल्लेखनीय है कि निदेशक ने गत 18 अप्रैल को सभी जिला पदाधिकारियों को पत्र जारी कर प्रशिक्षित शिक्षकों का मानदंड बदल दिया था।
नए मानदंडों के अनुसार तीसरे चरण में हो रही नियुक्त में केवल सत्र 2010-11 में बीएड करने वालों को नियुक्ति के योग्य माना गया था।
29 सितंबर 2012 को शिक्षकों की नियुक्ति का विज्ञापन निकाला गया था।
इस संबंध में सर्वानंद मांझी व निरंजन कुमार सहित दर्जनों अभ्यर्थियों ने न्यायालय में याचिका दायर की थी जिस पर न्यायाधीश वीएन सिन्हा की पीठ ने सुनवाई की।
कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि विज्ञापन प्रकाशित होने की तिथि के पहले आवेदकों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया था, लेकिन निदेशक ने सत्र 2011-2012 में बीएड उत्तीर्ण करने वालों को नियुक्ति से वंचित कर दिया।
उन्होंने बताया कि जबकि पात्रता परीक्षा में यह मानदंड निर्धारित था कि परीक्षा पास होने के 7 वर्षो तक अभ्यर्थी चयन के योग्य माने जाएगें।
सुनवाई में यह भी बताया गया कि विज्ञापन के अनुसार सैकड़ों शिक्षकों को नियुक्ति पत्र भी दे दिया गया था। उनसे काम भी लिया जाने लगा लेकिन अचानक निदेशक ने पत्र जारी कर शिक्षकों को हैरत में डाल दिया।
इस पर अपर महाधिवक्ता अंजनी कुमार एवं अधिवक्ता अजय ने राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा।