बिहार में पूरी तरह शराबबंदी लागू होने के बाद अब इसके साइड इफेक्ट भी सामने आने लगे हैं, राज्य के अस्पतालों में सैकडों की संख्या में ऐसे लोगों को भर्ती कराया गया है जो शराब न मिलने के कारण बीमार पड़ने लगे हैं। डॉक्टरों के अनुसार लगातार पीने के कारण इनके शरीर को शराब की लत लग चुकी है ऐसे में अचानक शराब छूटने से अब दिक्कत बढ़ने लगी है।
डॉक्टरों के पास पहुंचे कुछ मामलों में ऐसे थे जो अपने परिवार वालों को ही नहीं पहचान पा रहे थे तो एक व्यक्ति साबुन की पूरी टिक्की ही खा गया था। राज्य की मद्य निषेध सोसायटी के अनुसार बुधवार तक राज्य के 38 नए नशा मुक्ति केन्द्रों पर इस तरह के 749 मामले पहुंच चुके थे।
औरांगाबाद स्थित नशा मुक्ति केन्द्र के अधिकारी डा. आरके सिंह ने बताया कि यहां लाया गया एक व्यक्ति ऐसा था जो अपने परिवारवालों को ही नहीं पहचान पा रहा था, परिजनों के अनुसार वह रोजाना 600-1200 एमएल शराब पीता था। जब उसे केन्द्र पर लाया गया तो वह अपने पैरों पर भी खड़ा नहीं हो पा रहा था।
बुधवार को कुछ खबरें ऐसी भी थी कि बेतिया जिले में एक व्यक्ति शराब की लत पूरी करने के लिए साबुन ही चबा गया। कुछ नशा मुक्ति केन्द्रों से मिली रिपोर्ट के अनुसार वहां लाए गए ऐसे लोगों की बड़ी संख्या थी जो शराब की लत के चक्कर में कागज और दर्द निवारक दवाइयों को खा गए।