बिहार में राजनीति हर पल पर नई करवट बदल रही है। नीतीश के मुख्यमंत्री पद को लेकर जहां लालू के अडियल रुख के बाद जनता परिवार के विलय की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं वहीं राजद और जदयू के गठबंधन पर भी संकट खड़ा हो गया है।
लालू जहां अपने रुख से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं वहीं जेडीयू नेताओं ने अभी भी उम्मीद नहीं छोड़ी है। जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने एक बार फिर उम्मीद जताई कि बिहार के आगामी चुनाव जेडीयू जनता दल और कांग्रेस के साथ मिलकर ही लड़ेगा।
उनके इस दावे में कितना दम है यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन यह भी तय है कि हर कोई अलग लड़ने की तैयारी भी करे बैठा है।
वहीं भाजपा पूरी तरह वेट एंड वाच की स्थिति में है। बिहार भाजपा नेताओं के साथ ही केन्द्रीय नेतृत्व की निगाहें नीतीश से खार खाए बैठे मांझी पर जमी हैं जो उनके लिए चुनाव में दलित वोटों को जोड़ने के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।