बिहार के गोपालगंज जिले से फर्जीवाड़ा कर शिक्षा विभाग को चूना लगाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के आधार पर पिछले करीब 13 वर्षों से सरकारी स्कूलों में नौकरी कर रहीं दो शिक्षिकाओं के खिलाफ हथुआ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई गहन जांच के बाद अमल में लाई गई है। जांच में दोनों शिक्षिकाओं के शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाए गए।
निगरानी ब्यूरो की शिकायत पर मुकदमा दर्ज
जानकारी के अनुसार, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के उपाध्यक्ष सह सहायक जांचकर्ता आसिफ इकबाल मेहंदी ने खुद हथुआ थाने में उपस्थित होकर दोनों आरोपी शिक्षिकाओं के खिलाफ लिखित आवेदन दिया। निगरानी विभाग ने पुलिस को दिए गए आवेदन के साथ शिक्षिकाओं के फर्जी प्रमाण पत्रों से जुड़े ठोस साक्ष्य और दस्तावेज भी उपलब्ध कराए हैं, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
2013 से कर रही थीं नौकरी
इस मामले में वर्ष 2013 से नियोजित दो शिक्षिकाओं को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनमें पहली आरोपी अंजली कुमारी हैं, जो मटिहानी माधव मध्य विद्यालय में कार्यरत थीं। अंजली कुमारी मूल रूप से सिवान जिले के बरईपट्टी गांव निवासी ददन सिंह की पुत्री बताई जाती हैं। वहीं दूसरी आरोपी राखी सिंह हैं, जो पिपरा खास उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पदस्थापित थीं। राखी सिंह भी सिवान जिले की रहने वाली हैं और उनके पिता का नाम विष्णु किशोर सिंह बताया गया है, जो ओरमा गांव के निवासी हैं। दोनों शिक्षिकाएं पिछले एक दशक से अधिक समय से सरकारी वेतन और सुविधाओं का लाभ उठा रही थीं।
जांच रिपोर्ट आते ही स्कूल छोड़कर हुईं फरार
सूत्रों के मुताबिक, उच्च न्यायालय के निर्देश पर जब निगरानी विभाग ने शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की स्क्रूटनी शुरू की, तो दोनों शिक्षिकाओं के अंकपत्र और डिग्रियों में भारी विसंगतियां और गड़बड़ियां पाई गईं। इसके बाद निगरानी विभाग ने तुरंत इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की। जैसे ही हथुआ थाने में मुकदमा दर्ज होने की भनक दोनों शिक्षिकाओं को लगी, वे अपने-अपने विद्यालय से बिना किसी सूचना के फरार हो गईं।
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गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छापेमारी जारी
हथुआ थाना पुलिस ने मामला दर्ज होने की पुष्टि करते हुए कहा है कि फर्जीवाड़े से जुड़े सभी साक्ष्यों को कब्जे में ले लिया गया है। पुलिस की एक विशेष टीम दोनों फरार शिक्षिकाओं की गिरफ्तारी के लिए उनके संभावित ठिकानों और पैतृक गांवों में लगातार छापेमारी कर रही है। इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य फर्जी प्रमाण पत्रधारी शिक्षकों के बीच भी हड़कंप मच गया है।