सिवान के एमएच नगर थाना क्षेत्र के सेमरी गांव के समीप बीते रविवार की शाम एक मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, लेकिन इस पूरे मामले में अब पुलिस की भूमिका ही कटघरे में खड़ी हो गई है। ऑटो और स्कॉर्पियो के बीच साइड लेने को लेकर शुरू हुई कहासुनी फायरिंग, तोड़फोड़ और पुलिस पर हमले तक पहुंच गई।
ऑडियो में बातचीत इस प्रकार है:
मुर्शीद - हम तो घर चले आए हैं।
थाना प्रभारी - दिलवाइए न लिखकर, फिर कल कहिएगा कि केस यह नहीं किए, वह नहीं किए।
मुर्शीद - हम गए थे, लेकिन दोनों पक्ष समझौते के लिए ही थे।
थाना प्रभारी - यह सब समझौता होता है, इतना आग लगाकर?
मुर्शीद - हम तो चले आए।
थाना प्रभारी - चले नहीं आए, आइए और लिखवाकर बढ़िया से एक दीजिए।
मुर्शीद - फिर तो उसके घर वालों के पास जाना पड़ेगा न।
थाना प्रभारी - जो भी हो, आपका क्षेत्र है।
मुर्शीद - दोनों पक्ष की रुचि नहीं है केस करने में, देखे हैं तो हम चल दिए।
थाना प्रभारी - देखिए, पूरा बवाल हो गया है, पुलिस तो छोड़ेगी नहीं न।
मुर्शीद - दोनों पक्ष की रुचि नहीं थी, इसलिए हम चल दिए।
थाना प्रभारी - आप लिखवाकर दीजिए न, हम तो मुस्लिम पक्ष से हैं न, आप लिखवाकर दीजिए न।
मुर्शीद - ठीक है, हम देख रहे हैं, बात कर रहे हैं, ठीक है सर।
थाना प्रभारी - समझे, कितने देर में फोन करेंगे?
मुर्शीद - थोड़ी देर में ही उन लोगों के पास फोन कर रहे हैं।
थाना प्रभारी - ठीक है, जल्दी बात करके बताइए।
मुर्शीद - ठीक है सर।
थाना प्रभारी बना रहे केस लिखवाने का दबाव
इस पूरे ऑडियो में जहां एक ओर मुखिया लगातार यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि दोनों पक्ष केस नहीं करना चाहते और समझौते के मूड में हैं, वहीं दूसरी ओर थाना प्रभारी द्वारा आवेदन दिलवाने के लिए दबाव बनाने और खुद को एक समुदाय विशेष के पक्ष में बताने की बात सामने आ रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस अब निष्पक्ष कानून व्यवस्था की जगह संख्या और समुदाय के आधार पर काम करेगी? क्या न्याय की जगह ‘पक्ष’ देखकर कार्रवाई होगी?
थानेदार ने पत्रकार से किया अशिष्टपूर्ण व्यवहार
जब इस संबंध में थाना प्रभारी राजीव कुमार पटेल से बात की गई, तो उन्होंने पहले मुखिया को पहचानने से ही इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, संवाददाता से बातचीत के दौरान उनका रवैया भी बेहद कड़ा और अशिष्टपूर्ण रहा।
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