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Bihar News: छपरा में ‘रोशनी’ के नाम पर अंधेरा, सत्ताधारी विधायक ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया

Sat, 07 Feb 2026 10:10 AM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला,छपरा

सार

छपरा शहर में सड़कों पर पसरे अंधेरे को लेकर सत्ताधारी दल की विधायक छोटी कुमारी ने बिहार विधानसभा में अपनी ही सरकार, नगर निगम के मेयर और अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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सत्ताधारी विधायक ने स्ट्रीट लाइट घोटाले पर अपनी ही सरकार को घेरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार के छपरा में सड़कों पर पसरा अंधेरा अब व्यवस्था की नाकामी का प्रतीक बनता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस अंधेरे के खिलाफ आवाज़ विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल की महिला विधायक उठा रही हैं। छपरा सदर की भाजपा विधायक छोटी कुमारी ने बिहार विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रश्न के जरिए नगर निगम क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट घोटाले का मुद्दा उठाकर अपनी ही सरकार, नगर निगम के मेयर और अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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विधानसभा में उठाया स्ट्रीट लाइट घोटाले का मामला

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार के समक्ष नगर विकास एवं आवास मंत्री और ऊर्जा मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए विधायक छोटी कुमारी ने कहा कि छपरा नगर निगम क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन शहर की हकीकत यह है कि रात होते ही प्रमुख सड़कें अंधेरे में डूब जाती हैं। उन्होंने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नगर पालिका चौक से थाना चौक की ओर जाने वाली सड़क, डाकबंगला रोड सहित कई अन्य प्रमुख सड़कें आज भी अंधेरे में हैं। यह स्थिति साफ तौर पर सरकारी धन की लूट की ओर इशारा करती है।

‘सरकारी पैसा गया कहां?’—विधायक का तीखा सवाल

छपरा सदर से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं विधायक छोटी कुमारी ने तीखे शब्दों में सवाल किया कि आखिर सरकारी पैसा गया कहां? क्या स्ट्रीट लाइटें सिर्फ टेंडर और फाइलों में ही लगाई गईं? उन्होंने इसे सरकारी धन की खुली लूट बताते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
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‘विकास नहीं, टेंडर संस्कृति फल-फूल रही है’

विधायक ने कटाक्ष करते हुए कहा कि नगर परिषद से नगर निगम बने एक दशक बीत चुका है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं आज भी भगवान भरोसे चल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम में विकास नहीं, बल्कि टेंडर संस्कृति फल-फूल रही है। खरीद होती है, भुगतान होता है, लेकिन रोशनी जमीन पर कहीं नजर नहीं आती। अधिकारी फायदे में हैं और आम जनता अंधेरे में चलने को मजबूर है।

सुरक्षा पर भी खतरा, लोगों में नाराजगी

उन्होंने कहा कि सड़कों पर अंधेरा होना सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल स्ट्रीट लाइट की मरम्मत और खरीद के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में लाइटें या तो बंद रहती हैं या फिर गायब ही रहती हैं।
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‘दाल में कुछ काला या पूरी दाल ही काली’

सत्ताधारी विधायक द्वारा अपनी ही सरकार के मेयर और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग किए जाने से यह साफ हो गया है कि या तो दाल में कुछ काला है, या फिर पूरी दाल ही काली है।
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