गोपालगंज जिले के थावे थाना क्षेत्र के पिठौरी और मठ गौतम गांव के तीन युवकों की बेंगलुरु में हुई हत्या के बाद उनका शव जैसे ही गांव पहुंचा, मातम छा गया। तीनों युवकों की मौत की खबर पहले ही गांव में गम का माहौल बना चुकी थी, लेकिन शवों के दरवाजे पर पहुंचते ही परिजनों की चीख-पुकार सब्र की सारी सीमाएं तोड़ गया। माताओं की ममता, बहनों के सपने और पिता की उम्मीदें सब कुछ पल भर में बिखर गया।
आरोपी का परिवार घर से फरार
जानकारी के मुताबिक, मृत युवकों की पहचान पिठौरी गांव निवासी रामाधार यादव के 21 वर्षीय पुत्र राधेश्याम यादव, द्वारिका राम के पुत्र अंशु कुमार और मठ गौतम गांव निवासी ओमप्रकाश साह के 19 वर्षीय पुत्र दीपू कुमार के रूप में हुई है। तीनों युवकों की होली के दिन बेंगलुरु के सरजापुर में लोहे की रॉड से पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। घटना के बाद आरोपी सोनू कुमार और उसका भगिना सुधीर फरार हैं। वहीं, उनका पूरा परिवार गांव से लापता है। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
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पार्टी के दौरान शुरू हुआ विवाद बना खूनी संघर्ष
बताया जा रहा है कि होली के दिन तीनों युवक बेंगलुरु में मजदूरी का काम कर रहे साथियों के साथ पार्टी कर रहे थे। उसी दौरान अंशु और सोनू के बीच विवाद हुआ, जिसमें राधेश्याम और दीपू ने बीच-बचाव की कोशिश की। लेकिन मामला हिंसक हो गया। सोनू और सुधीर ने रॉड से हमला कर राधेश्याम और अंशु की सातवीं मंजिल पर ही पीट-पीट कर हत्या कर दी।
घटना में राधेश्याम के छोटे भाई बीरबल को भी बुरी तरह पीटा गया, जो किसी तरह बच निकला। वहीं दीपू जान बचाकर भागा, लेकिन आरोपियों ने उसका पीछा किया और तीसरी मंजिल पर उसकी भी रॉड से पीटकर हत्या कर दी।
‘तुम्हारी शादी धूमधाम से करेंगे’
घटना से ठीक एक दिन पहले अंशु ने अपनी बहन से वीडियो कॉल पर बातचीत की थी। उसने कहा था कि तुम्हारी शादी बहुत धूमधाम से करेंगे, फिर घर बनाएंगे और फिर मेरी शादी होगी। लेकिन यह वादा अधूरा रह गया। पांच महीने पहले ही अंशु कमाने बेंगलुरु गया था और अपने परिवार के बेहतर भविष्य के सपने बुन रहा था। उसने घर बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
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बहन की शादी के लिए पैसे कमाने गया था, अब अर्थी में लौटा
राधेश्याम की बहन की शादी मई महीने में तय थी। इसी के लिए वह भाई बीरबल के साथ काम करने बेंगलुरु गया था। लेकिन अफसोस कि बहन की शादी की तैयारी करने वाला भाई अब खुद कंधों पर लौटा। परिवार के लिए यह सदमा असहनीय है।
पहला कमाई का सफर बना जिंदगी का अंतिम सफर
दीपू अभी इंटर की परीक्षा देकर अपने दोस्त अंशु के पास पहली बार मजदूरी करने गया था। वह परिवार का सबसे छोटा बेटा था। उसकी मां से आखिरी बार बात 15 तारीख को शाम चार बजे हुई थी। कुछ घंटे बाद जब उसका मोबाइल बंद मिला, तो चिंताएं बढ़ गईं। बाद में राधेश्याम के भाई बीरबल से पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली। दीपू के भाई ने बताया कि वह जान बचाकर भाग रहा था, लेकिन आरोपियों ने उसका पीछा कर उसे तीसरी मंजिल पर पकड़ कर मार डाला।
पोस्टमार्टम के बाद गांव लौटा शव
तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर पुलिस ने उन्हें परिजनों को सौंप दिया। शव जैसे ही गांव पहुंचे, हर आंख नम हो गई। गांव के लोग भी स्तब्ध हैं कि होली की खुशी पलभर में मातम में बदल गई। प्रशासन की निगरानी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया की जा रही है, वहीं पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।