सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा मंगलवार को गोपालगंज पहुंची। इस दौरान उन्होंने जिलेवासियों को कुल 352 करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात दी। बरौली प्रखंड के हाईस्कूल मैदान में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में उन्हें सुनने और देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग जुटे।
325.48 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
समृद्धि यात्रा के तहत मुख्यमंत्री ने कुल 325.48 करोड़ रुपये की योजनाओं से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया। इनमें 131.44 करोड़ रुपये की लागत से तैयार परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया, जबकि 194.04 करोड़ रुपये की नई योजनाओं का शिलान्यास किया गया।
रोजगार और नौकरी के लक्ष्य का एलान
जनसंवाद को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में एक करोड़ नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में 10 लाख नौकरी और 10 लाख रोजगार देने का जो वादा किया गया था, उसे पूरा किया गया है। उनके अनुसार अब तक नौकरी और रोजगार पाने वालों की संख्या 40 से 50 लाख तक पहुंच चुकी है।
विपक्ष और पूर्व सरकार पर टिप्पणी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष पर निशाना साधते हुए लालू यादव की सरकार पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि 2005 से पहले बिहार में शाम के बाद लोग घर से बाहर निकलने में डरते थे। उस समय हिंदू-मुस्लिम विवाद, शिक्षा व्यवस्था की कमी, इलाज के इंतजामों की कमी और सड़कों की खराब स्थिति जैसी समस्याएं थीं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आने के बाद इन सभी क्षेत्रों में सुधार किया गया।
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महिला सशक्तिकरण पर क्या बोले?
नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों को गिनाते हुए बताया कि वर्ष 2006 में पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण, 2013 में पुलिस में 35 प्रतिशत और 2016 में सभी सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि आज बिहार पुलिस में महिलाओं की संख्या देश में सबसे अधिक है।
स्वास्थ्य और जीविका से जुड़े आंकड़े रखे सामने
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2006 में विश्व बैंक से कर्ज लेकर ‘जीविका’ समूह की शुरुआत की गई थी, जिनकी संख्या अब बढ़कर एक करोड़ 40 लाख हो गई है। उन्होंने कहा कि पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हर महीने औसतन 39 मरीज ही इलाज के लिए आते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर लगभग 11 हजार 600 हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले बिहार में केवल छह मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या अब 12 हो गई है और शेष 27 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं।