परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो उठा
- फोटो : Amar Ujala
सारण जिले के दाउदपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बरेजा गांव में शुक्रवार का दिन मातम में डूब गया। जिस बेटे के विदेश से लौटकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और बहन की शादी की जिम्मेदारी निभाने का इंतजार था, वह करीब दो महीने बाद ताबूत में गांव पहुंचा। जैसे ही अबू धाबी से विवेक ठाकुर का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो उठा। मां लीलावती कुंवर बेसुध हो गईं, जबकि बहन प्रियंका कुमारी और भाई अजीत कुमार ठाकुर का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। बड़ी संख्या में ग्रामीण शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे।
15 साल पहले हुआ था पिता का निधन
परिजनों ने बताया कि विवेक ठाकुर के पिता अमर ठाकुर का करीब 15 वर्ष पहले ही निधन हो गया था। पिता के साए के बिना पले-बढ़े विवेक ने परिवार की जिम्मेदारियां अपने कंधों पर उठा ली थीं। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की मदद करने और बहन की शादी के लिए पैसे जुटाने के उद्देश्य से वह एक एजेंट के माध्यम से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी स्थित एनपीसी नाइट्रोजन कंपनी में कारपेंटर के रूप में काम करने गया था, लेकिन कुछ समय पहले विवेक अचानक लापता हो गया। काफी खोजबीन के बाद कंपनी परिसर के समीप उसका शव बरामद हुआ। शव की पहचान होने में करीब 15 दिन लग गए। इसके बाद स्थानीय प्रशासन, भारतीय दूतावास और अन्य विभागीय औपचारिकताओं के कारण पार्थिव शरीर को भारत लाने में लगभग दो महीने का समय लग गया।
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शोक की लहर में डूब गांव
शुक्रवार की देर शाम जब एंबुलेंस से विवेक का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो पूरा बरेजा गांव शोक में डूब गया। हर किसी की जुबान पर यही बात थी कि जो युवक परिवार के सपनों को पूरा करने विदेश गया था, वह हमेशा के लिए अपनों से बिछड़ गया। अंतिम दर्शन के दौरान गांव में सन्नाटा पसरा रहा। परिजनों ने नम आंखों से विवेक को अंतिम विदाई दी। इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है और हर कोई शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहा है।