गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर प्रखंड में मंगलवार को पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समिति) चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। 20 पंचायतों के 60 मतदान केंद्रों पर कुल 58.41% मतदान दर्ज किया गया। इस बार मतदान प्रतिशत में वृद्धि देखी गई, जो पिछले 2019 के चुनाव के मुकाबले 6% अधिक है। अब, गिनती के बाद 20 पैक्स अध्यक्षों के भाग्य का फैसला होगा।
सुबह धीमा, दोपहर में तेज हुआ मतदान
जानकारी के मुताबिक, मतदान की प्रक्रिया सुबह सात बजे से शुरू हुई। लेकिन घने कोहरे के कारण 10 बजे तक मतदान की गति धीमी रही। जैसे ही धूप निकली, मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर बाद तक केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं, लेकिन तीन बजे के बाद मतदान की रफ्तार फिर धीमी हो गई।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन का योगदान
चुनाव प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। बैकुंठपुर थाना अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह ने सभी पंचायतों का दौरा कर मतदान केंद्रों पर निगरानी रखी। कहीं भी कोई बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। अधिकारियों, जैसे एआरओ बीईओ आशा कुमारी, बीएओ नागेश्वर मांझी, और एमओ रविंद्र राय ने चुनाव को स्वच्छ और शांतिपूर्ण बनाने में अहम भूमिका निभाई। मतदान केंद्रों पर अनाधिकृत व्यक्तियों और समर्थकों को 500 मीटर दूर रखने का सख्ती से पालन किया गया।
प्रवासी मतदाताओं का योगदान
इस बार पैक्स चुनाव में प्रवासी मतदाताओं की बड़ी भूमिका रही। दिल्ली, कोलकाता, पंजाब, और असम जैसे राज्यों में काम कर रहे ग्रामीण विशेष रूप से मतदान के लिए गांव लौटे। प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने प्रवासियों को मतदान की सूचना मोबाइल के जरिए दी, जिससे प्रेरित होकर कई प्रवासी मतदान में हिस्सा लेने के लिए लंबी यात्रा कर घर पहुंचे। उनके आने से मतदान प्रतिशत में भी वृद्धि दर्ज की गई।
महिला मतदाताओं की अहम भागीदारी
महिला मतदाताओं ने इस बार पैक्स चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। घर के काम निपटाने के बाद वे मतदान केंद्रों पर पहुंचीं और इत्मीनान से अपनी बारी का इंतजार कर वोट डाला। हालांकि जागरूकता अभियान का अभाव था, फिर भी महिला मतदाताओं की सक्रियता ने इस चुनाव को खास बना दिया।
चुनाव के बाद अगली प्रक्रिया
अब, मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन 20 पंचायतों के पैक्स अध्यक्ष पद के लिए कौन विजेता बनता है। पैक्स चुनाव, जो ग्रामीण विकास और सहकारी समितियों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इस बार बेहतर भागीदारी और शांतिपूर्ण माहौल के कारण चर्चा में है।