फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar: सीवान के इस गांव में पीपल की जड़ से निकली चांदी की बुद्ध मूर्ति, पूजा-अर्चना शुरू; इतिहासकार क्या बोले?

Sun, 28 Dec 2025 05:59 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान

सार

Bihar: सीवान के गोठी गांव में पीपल की जड़ से मिली चांदी की बुद्ध प्रतिमा के बाद पूजा शुरू हो गई। इतिहासकारों के अनुसार यह स्थल बोधगया से जुड़ा हो सकता है और यहां बौद्ध विहार होने की संभावना है।
विज्ञापन
चांदी की प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सीवान के जीरादेई प्रखंड क्षेत्र के मियां के भटकन पंचायत स्थित गोठी गांव में पीपल के वृक्ष की जड़ के नीचे मिली चांदी की बुद्ध प्रतिमा के पास रविवार से ग्रामीण महिलाओं ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। चांदी की बुद्ध मूर्ति मिलने से पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है।

इतिहासकार सह शोधार्थी डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि पीपल की जड़ के नीचे से पीपल के पत्ते के आकार की बुद्ध प्रतिमा का मिलना अत्यंत संयोगपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इतिहास की पुस्तकों में उल्लेख मिलता है कि बोधगया स्थित बोधि वृक्ष की डाल को कई स्थानों पर ले जाकर रोपा गया था।

डॉ. सिंह के अनुसार बौद्ध धर्म में प्रतीक पूजा का विशेष महत्व है। पीपल के पत्ते को संबोधि (बोधि) का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन काल में कला और स्थापत्य में भी पीपल के पत्तों का अंकन व्यापक रूप से किया गया। उन्होंने संभावना जताई कि पीपल की डाल रोपण से पूर्व उसकी जड़ के नीचे बुद्ध की प्रतिमा रखी गई होगी।

विज्ञापन


पढे़ं: मुजफ्फरपुर में नवविवाहिता की संदिग्ध अवस्था में मौत, ससुरालजनों पर दहेज हत्या का लगा आरोप

उन्होंने बताया कि चांदी की बुद्ध प्रतिमाएं किसी एक काल की उपज नहीं हैं, बल्कि विभिन्न ऐतिहासिक कालों में इनका निर्माण होता रहा है। गुप्त काल और उसके आसपास के समय में इनका निर्माण विशेष रूप से हुआ, लेकिन कुषाण काल से लेकर बाद के कालखंडों में भी धातु की बुद्ध प्रतिमाएं बनाई जाती रहीं।

डॉ. सिंह ने कहा कि इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में गुप्तकालीन ईंटें भी प्राप्त हो रही हैं, जिससे यहां किसी बौद्ध विहार के अस्तित्व की प्रबल संभावना बनती है। उन्होंने बताया कि ‘गोठी’ शब्द का अर्थ जमाव या समूह से है, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व की ओर संकेत करता है। यह पूरा विषय अंतरराष्ट्रीय आस्था और शोध से जुड़ा हुआ है, जिस पर गहन अध्ययन की आवश्यकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें