फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar: विधायक अनंत सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, गोपालगंज पुलिस ने कोर्ट से मांगी गंभीर धाराएं जोड़ने की अनुमति

Wed, 27 May 2026 04:20 PM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज

सार

मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गोपालगंज पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता की दो गंभीर गैर-जमानती धाराएं जोड़ने के लिए अदालत में अर्जी दी है। पुलिस ने धारा 111 (संगठित अपराध) और धारा 196 (समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना) लगाने की मांग की है।
विज्ञापन
मोकामा विधायक अनंत सिंह - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब गोपालगंज पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की दो गंभीर और गैर-जमानती धाराएं जोड़ने के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की है। पुलिस ने कोर्ट से धारा 111, जो संगठित अपराध से जुड़ी है, और धारा 196, जो विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने से संबंधित है, को मामले में शामिल करने की मांग की है।
विज्ञापन


पुलिस बोली- मामला सिर्फ हथियार प्रदर्शन तक सीमित नहीं

गोपालगंज पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन का नहीं है। जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे संगठित अपराध और समाज में जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर नफरत और वैमनस्य फैलाने के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नई धाराएं जोड़ने का फैसला किया है।

क्या हैं धारा 111 और 196?

कानून के जानकारों के मुताबिक, पुलिस द्वारा जोड़ी जाने वाली दोनों धाराएं गैर-जमानती हैं। धारा 111 संगठित अपराध से जुड़ी है। यह धारा किसी गिरोह या सिंडिकेट द्वारा की जाने वाली अवैध गतिविधियों पर लगाई जाती है। वहीं, धारा 196 धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग समूहों के बीच नफरत फैलाने के मामलों में लगाई जाती है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  पटना की मंडी में भीषण आग, कपूर और पूजा सामग्री की दुकान जलकर खाक; लाखों का नुकसान
विज्ञापन


10 साल तक की सजा का प्रावधान

अगर अदालत इन धाराओं को जोड़ने की अनुमति दे देती है और भविष्य में आरोप साबित हो जाते हैं, तो अनंत सिंह को कम से कम 10 साल तक की सजा हो सकती है। इन धाराओं के जुड़ने के बाद उनके लिए अग्रिम जमानत हासिल करना भी काफी मुश्किल माना जा रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें