सारण जिला मुख्यालय स्थित सदर प्रखंड, छपरा से सामने आए कथित ऑडियो में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान से जुड़े सदर प्रखंड, छपरा के प्रखंड समन्वयक (बीसी) अंकित कुमार गुप्ता पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया जा रहा है। बातचीत के दौरान जब एक हजार रुपये की मांग पर सवाल उठाया गया तो कथित तौर पर जो जवाब दिया गया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए।
‘मैनेजमेंट’ के नाम पर वसूली का आरोप
यह पूरा मामला केवल एक हजार रुपये की कथित अवैध वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से कथित तौर पर पैसे मांगे जाने के आरोपों को भी सामने लाता है। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या यह मांग किसी उच्चाधिकारी के संरक्षण में की जा रही थी या फिर संबंधित कर्मी अपने फायदे के लिए अधिकारियों का नाम ले रहा था।
जिस योजना का उद्देश्य गरीब लाभार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, अगर उसी के लाभ के लिए लाभार्थी से कथित तौर पर पैसे मांगे जाएं तो यह गंभीर मामला है। ऐसे में यह भी जांच का विषय है कि क्या यह छपरा सदर प्रखंड का इकलौता मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।
प्रशासनिक जांच की जरूरत
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
शौचालय निर्माण जैसी कल्याणकारी योजनाएं समाज में स्वच्छता और स्वास्थ्य सुधार के उद्देश्य से चलाई जाती हैं। इन योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी अवैध वसूली के पहुंचना चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन कथित ऑडियो की जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है। निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ऑडियो में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और कथित तौर पर सामने आए ‘मैनेजमेंट’ के दावे की वास्तविकता क्या है।
सदर प्रखंड छपरा अंचल कार्यालय।
सदर प्रखंड छपरा।