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बिहार में रिंग बांध टूटने पर तीन अभियंताओं पर कार्रवाई: मुख्यालय से अटैच, 10 गांव जलमग्न हुए; जांच के आदेश

Fri, 02 Oct 2026 02:13 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज

सार

गोपालगंज के बैकुंठपुर प्रखंड के शीतलपुर में रिंग बांध टूटने के मामले में जल संसाधन विभाग ने तीन अभियंताओं पर कार्रवाई की है। दो अभियंताओं को मुख्यालय से संबद्ध किया गया, जबकि एक को भोरे सिंचाई विभाग स्थानांतरित किया गया है।
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फाइल फोटो - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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गंडक नदी में भारी जलप्रवाह के कारण बैकुंठपुर प्रखंड के शीतलपुर में रिंग बांध टूटने के मामले में जल संसाधन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। विभाग ने प्रथम दृष्टया लापरवाही का दोषी मानते हुए तीन अभियंताओं को उनके पद से हटा दिया है। देर रात हुई इस कार्रवाई के तहत कार्यपालक अभियंता मोहम्मद साजिद इकबाल और सहायक अभियंता जावेद को मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। वहीं, कनिष्ठ अभियंता विकास कुमार को भोरे सिंचाई विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया है। तीनों अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है। इस निर्णय के बाद बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल गोपालगंज के कर्मियों और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।
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तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारी से मुक्त
गंडक नदी में 28 सितंबर को दर्ज 5.43 लाख क्यूसेक का जलप्रवाह गोपालगंज क्षेत्र में पहुंचते ही विकराल रूप धारण कर चुका था। इसके परिणामस्वरूप 30 सितंबर की सुबह करीब 6:30 बजे शीतलपुर स्थित रिंग बांध अचानक टूट गया। बांध में दरार पड़ते ही पानी की धारा बस्तियों की ओर मुड़ गई। इस घटना के तुरंत बाद हरकत में आए जल संसाधन विभाग ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका तय करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया। विभाग ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने के आदेश जारी किए हैं। यह समिति अभियंताओं की कार्यप्रणाली और बांध के रखरखाव से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं का गहन अध्ययन करेगी।

दस गांव हुए जलमग्न
शीतलपुर रिंग बांध टूटने के कारण आसपास के करीब 10 गांव बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब चुके हैं। बस्तियों में पानी भर जाने से स्थानीय लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और ग्रामीण अत्यंत आक्रोशित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस घटना के पीछे किसी संभावित साजिश की भी जांच होनी चाहिए। क्षेत्र के लोगों ने जल संसाधन विभाग के प्रशासनिक दावों पर भी सवाल खड़े किए हैं। जानकारों के अनुसार, जुलाई और अगस्त महीने में विभाग को भेजी गई आधिकारिक रिपोर्ट में इस सुरक्षा बांध को पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत बताया गया था।
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उच्चस्तरीय जांच के आदेश
सुरक्षा रिपोर्ट में सुरक्षित दर्शाए गए बांध के अचानक ढह जाने से विभागीय कार्यशैली और निरीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उच्चस्तरीय जांच टीम प्रत्येक पहलू का विश्लेषण करेगी। जांच के बाद ही बांध टूटने के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। आपदा की इस स्थिति में प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। वहीं, विभाग पानी के बहाव को नियंत्रित करने और क्षति को रोकने में जुटा हुआ है।
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