बिहार में आज पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बीच एक खास मुलाकात हुई। मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने नीतीश कुमार जी को बधाई दी और कहा कि आपके द्वारा बिहार के विकास और सुशासन के लिए किए गए कार्यों और सपनों को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के सहयोग से बिहार को विकसित राज्य बनाने का काम किया जा रहा है। हम उनके सुशासन की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा वर्षों से उठाई जा रही गाद नीति की मांग पर संज्ञान लिया गया है। इस दिशा में सरकार ने ऐतिहासिक पहल की है। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ इस संबंध में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत विभिन्न नदियों से लगभग चार लाख क्यूबिक मीटर गाद निकालने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। गाद निकालने का कार्य मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। निकाली गई गाद का उपयोग भी किया जाएगा। इससे बिहार में बाढ़ की समस्या से राहत मिलेगी। साथ ही, खेतों की मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मदद मिलेगी।
पिछले वर्ष की तुलना में अधिक विशेष ट्रेनें चलाने का आग्रह किया
यह बिहार के जल प्रबंधन और किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार के विभिन्न मंत्रियों से मुलाकात कर बिहार के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई है। केंद्रीय रेल मंत्री से दीपावली एवं छठ के अवसर पर बिहार आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए पिछले वर्ष की तुलना में अधिक विशेष ट्रेनें चलाने का आग्रह किया गया है। पिछले वर्ष 10 हजार से अधिक जोड़ी विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं। इस बार इससे भी अधिक ट्रेनें चलाने का अनुरोध किया गया है, ताकि पर्व-त्योहार के दौरान बिहार आने वाले लोगों को बेहतर रेल सुविधा मिल सके।
केंद्रीय रेल मंत्री से अयोध्या और सीतामढ़ी के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या से मां सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी को सीधे जोड़ने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल होगी।
'अब तक 1,000 से अधिक उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी'
मुख्यमंत्री ने कहा कि गया में भाव्या योजना के माध्यम से इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इसी तर्ज पर बिहार में पांच अन्य स्थानों पर भी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने का आग्रह किया गया है। मुजफ्फरपुर और दरभंगा का प्रस्ताव भारत सरकार को दिया जा चुका है। मुझे विश्वास है कि इन प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति मिलेगी। इससे बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
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उन्होंने बताया कि बिहार में लगभग 13 हजार एकड़ भूमि उद्योगों के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक 1,000 से अधिक उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है। आगे और अधिक निवेशकों एवं उद्यमियों को इस पहल से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में डाटा सेंटर बनकर तैयार हो गया है। वर्ष 2024 में इसके लिए जमीन उपलब्ध कराई गई थी। पटना में 'कंट्रोल एस' के नाम से स्थापित डाटा सेंटर का उद्घाटन हमने स्वयं किया है। यह राज्य के तकनीकी एवं औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर बिहार में विकसित किए जा रहे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति शीघ्र प्रदान करने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी आवश्यक सहमति मांगी गई है, ताकि अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी पीपीपी मोड पर इको-टूरिज्म की आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जा सके।