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मोदी के बहकावे में नहीं आएगी जनता: राजबब्बर

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राजबब्बर न सिर्फ कांग्रेस सांसद और प्रवक्ता हैं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के स्टार प्रचारक भी है। बिहार में कांग्रेस और महागठबंधन के चुनाव प्रचार में जाने की तैयारी कर रहे राज बब्बर से विनोद अग्निहोत्री की बातचीत।
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बिहार में कांग्रेस नीतीश कुमार और लालू यादव के सहारे चुनाव मैदान में है। क्या पार्टी को सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर अब भरोसा नहीं रहा?

कांग्रेस को अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की लोकप्रियता पर पूरा भरोसा है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी बिहार में पार्टी और महागठबंधन केलिए चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं।

नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव महागठबंधन के दो प्रमुख दलों के शीर्ष नेता हैं। हम एकजुट होकर भाजपा की सांप्रदायिक नीतियों के खिलाफ लड़ रहे हैं।

एक समय कांग्रेस बिहार की एक छत्र पार्टी थी। लेकिन आज लालू यादव और नीतीश कुमार के गठबंधन की जूनियर पार्टनर बनकर चुनाव लड़ रही है। क्या यह कांग्रेस नेतृत्व की कमजोरी नहीं है?
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यह सही है कि कांग्रेस एक समय बिहार में सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन कुछ कारणों से आज हम उतने मजबूत नहीं हैं जितने पहले थे। लालू यादव के साथ कांग्रेस लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन कर चुकी है।

लेकिन लोकसभा चुनावों में त्रिकोणात्मक संघर्ष का फायदा भाजपा को मिला और धर्मनिरपेक्ष गैर भाजपा मतों के बंटवारे की वजह से एनडीए बिहार में 31 सीटें जीतने में कामयाब रहा।

इसलिए विधानसभा चुनावों में वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए तीनों दलों ने महागठबंधन बनाया है। अब भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए पर हमारा महागठबंधन हर जगह भारी है।
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इस दावे का आधार क्या है?

क्या आपको महागठबंधन की जीत का पूरा भरोसा है?

महागठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलेगा और हमारी सरकार बनेगी। बिहार की जनता अब लोकसभा चुनावों की तरह भाजपा और नरेंद्र मोदी केबहकावे में आने वाली नहीं है। मुमकिन है कि महागठबंधन को दो तिहाई बहुमत भी मिल सकता है।

आपके इस दावे का आधार क्या है?

जैसा कि मैने पहले कहा कि इस बार महागठबंधन और एनडीए के बीच सीधा मुकाबला है। इसलिए गैर भाजपा धर्मनिरपेक्ष मतों का बंटवारा नहीं हो रहा है।

दूसरे केंद्र में मोदी सरकार के डेढ़ साल केशासन के दौरान उन तमाम वादों और दावों की पोल खुल चुकी है जो भाजपा और मोदी ने लोकसभा चुनावों में करकेजनता को भ्रमित कर दिया था।
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इसका क्या जवाब है ?

लेकिन एनडीए के पास नरेंद्र मोदी जैसा करिश्माई नेता, विकास और सुशासन का नारा है जबकि महागठबंधन के ऊपर लालू राज के जंगल राज का बोझ भी है?

नरेंद्र मोदी का करिश्मा उतर चुका है। जहां तक जंगल राज की बात है तो बिहार की जनता भाजपा और आरएसएस के संाप्रदायिक एजेंडे को समझ गई है।

महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार हैं जिनके विकास कार्यों का ट्रैक रिकार्ड बिहार की जनता केसामने है। नीतीश के शासन काल में हुए विकास से भाजपा भी इनकार नहीं कर सकती। भाजपा और एनडीए के पास तो कोई नेता ही नहीं है।

लेकिन भाजपा और एनडीए के नेता तो बिहार के पिछड़े पन केलिए कांग्रेस के 40 साल और लालू नीतीश राज के 25 सालों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इसका क्या जवाब है ?

केंद्र में मोदी सरकार के डेढ़ साल के शासन ने ही भाजपा केदावों की पोल खोल दी है। काले धन की वापसी, हर भारतीय केखाते में 15 लाख रुपए जमा कराने, महंगाई पर काबू पाने, पाकिस्तान और चीन से भारत की सीमाओं की सुरक्षा, महिला की सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द आदि सभी मुद्दों पर मोदी सरकार बुरी तरह विफल साबित हुई है। बिहार की जनता इसे समझ चुकी है।
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