बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट परिषद में विधायक विजय कुमार मंडल को शामिल किया गया है। विजय कुमार मंडल को खुश और एनडीए गठबंधन को मजबूत करने और ओबीसी वोटरों को साधने के लिए मंत्री बनाया गया है। विजय कुमार मंडल अररिया के सिकटी विधानसभा से पांच बार विधायक रह चुके हैं और ओबीसी वोटरों में काफी पकड़ रखते हैं।
बता दें कि साल 2000 ई में राबड़ी देवी के कैबिनेट में भी मंत्री रह चुके हैं। उनके शामिल होने से भाजपा एनडीए गठबंधन को ओबीसी वोटरों को साधने में मदद मिलेगी। विजय मंडल रामविलास पासवान का भी दुलारा रह चुके हैं और लोजपा से भी विधायक रह चुके हैं। पहली बार आनंद मोहन की पार्टी से ही विधायक का चुनाव लड़ा था, जिसमें जीत भी हासिल की थी।
1995 में आनंद मोहन की पार्टी से जीत दर्ज करने वाले विजय कुमार मंडल को लालू यादव ने राजद में शामिल कर लिया था। लेकिन अगली बार उन्होंने जब टिकट नहीं मिला तो वो निर्दलीय मैदान में कूदे और वर्ष 2000 के चुनाव में वो निर्दलीय जीते थे, जिसके बाद राजद फिर एक बार उन्हें अपने साथ लेकर गई और बिहार सरकार में राज्यमंत्री बनाया। विजय कुमार मंडल अररिया के सिकटी विधानसभा से भाजपा के टिकट पर जीते हैं। पहली बार उन्होंने 1995 में बिहार विधानसभा चुनाव जीता था, जब यह अररिया विधानसभा हुआ करता था। तब उन्होंने आनंद मोहन की बिहार पिपुल्स पार्टी से चुनाव लड़ा था और आनंद मोहन की पार्टी से बिहार में जीत दर्ज करने वाले इकलौते विधायक बने थे।
विजय कुमार मंडल रामविलास पासवान का भी काफी करीबी थे। विजय कुमार मंडल ने रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा से भी चुनाव लड़ा और सिकटी विधानसभा से जीत हासिल की। तब तत्कालीन विधायक प्रदीप कुमार सिंह अररिया से सांसद बने थे और सिकटी की सीट खाली हुई थी। विजय कुमार मंडल को जिस दल ने अपने साथ लिया, उसे फायदा ही हुआ। विजय कुमार मंडल 2015 और 2020 के विधानसभा में भाजपा की ओर से लड़कर विधायक बने। वर्तमान नीतीश सरकार में वो मुख्य सचेतक की भूमिका में हैं।
हालांकि ऐसा माना जाता है कि वो पार्टी से नाराज भी चल रहे थे, जिसके बाद अब उन्हें मंत्री बनाकर पार्टी भी उनकी नाराजगी दूर करने का प्रयास करेगी। विधायक विजय कुमार मंडल को मंत्री बनाकर भाजपा व एनडीए सरकार एकसाथ कई जातियों को साधेगी। विजय कुमार मंडल केवट जाति से ताल्लुक रखते हैं। सीमांचल की राजनीति में विजय कुमार मंडल की मजबूत पकड़ बतायी जाती है। भाजपा अपने इस फैसले से बिहार के अति पिछड़ा वोटरों तक अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहेगी।