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Bihar News: 13 जिंदगियों का सरेआम कत्ल; ‘न्याय रथ’ का खून से सना सच, कब तक हाईवे पर मौत बन दौड़ेंगी बसें?

Sun, 12 Apr 2026 05:24 PM IST
पूर्णिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटिहार

सार

Bihar News: कटिहार के एनएच-31 पर नशे में धुत बस चालक की लापरवाही से हुए भीषण हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। ‘न्याय रथ’ बस की तेज रफ्तार और अनियंत्रित ड्राइविंग के बावजूद पूरे 800 किमी सफर में प्रशासन की चूक सामने आई। यह बस सेवा पहले भी हादसों में शामिल रही है, जिससे सिस्टम की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
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क्षतिग्रस्त बस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कटिहार के एनएच-31 पर शनिवार की शाम जो कुछ भी हुआ, वह महज एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता और मानवीय क्रूरता का जीवंत प्रमाण है। 13 मासूम जिंदगियां एक ऐसे ‘न्याय रथ’ के नीचे कुचल दी गईं, जिसका चालक शराब के नशे में धुत होकर 100 की रफ्तार से मौत का खेल खेल रहा था। यह इनसाइड स्टोरी उन तथ्यों को उजागर करती है, जो बताती है कि कैसे 800 किलोमीटर लंबे सफर में सिस्टम सोता रहा और मासूमों की चीखें हाईवे की हवा में दफन हो गईं।

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डेढ़ किलोमीटर के दायरे में चार बार बेकाबू हुई बस
असम के होजाई से चुनावी कर्मियों को लेकर लौट रही इस बस के चालक पर 800 किमी के सफर की थकान और शराब का नशा इस कदर हावी था कि उसे इंसान की जान की कीमत कौड़ियों जैसी लगने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गेड़ाबाड़ी से निकलने के बाद मात्र डेढ़ किलोमीटर के दायरे में बस चार बार बेकाबू हुई।

रफ्तार कम करने की भीख मांगते रहे यात्री
यात्रियों ने हाथ जोड़कर ड्राइवर से गाड़ी रोकने या रफ्तार कम करने की भीख मांगी, लेकिन खलासी ने समय पर पहुंचने का दबाव बनाकर चालक को और तेज भगाने के लिए उकसाया। नतीजा 100 किमी/घंटा की वह रफ्तार, जिसने सामने से आ रही पिकअप को लोहे के मलबे में तब्दील कर दिया।
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यात्रियों की आंखों के सामने शराब पीता रहा ड्राइवर
शराबबंदी वाले राज्य में एक बस ड्राइवर सरेआम जाम छलकाकर 800 किलोमीटर का सफर तय कर लेता है और उसे रोकने वाला कोई नहीं मिलता यह सवाल बिहार की चेकपोस्टों और हाईवे पेट्रोलिंग की मुस्तैदी पर तमाचा है। यात्रियों की आंखों के सामने ड्राइवर शराब पीता रहा, बस लहराती रही, लेकिन किसी भी प्रशासनिक बिंदु पर उसे नहीं रोका गया।

न्याय रथ का काला अतीत: 2019 का वह अग्निकांड
यह ‘न्याय रथ’ बस सेवा पहले भी मासूमों का लहू पी चुकी है। अगस्त 2019 में पूर्णिया बस स्टैंड के पास इसी सेवा की एक बस डिवाइडर से टकराकर धू-धू कर जल उठी थी। उस वक्त एक महिला की जलकर मौत हुई थी और 17 लोग अपंगता के कगार पर पहुंच गए थे। सात साल बाद भी उसी बस सेवा की लापरवाही ने आज 13 और लोगों को मौत की नींद सुला दिया।

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मुआवजे से कम होगा दर्द
पीएम और सीएम राहत कोष से कुल 4-4 लाख रुपये के मुआवजे का एलान तो हो गया है, लेकिन क्या यह उन बच्चों के सिर पर मां का आंचल वापस ला पाएगा? मृतकों में अधिकांश महिलाएं थीं, जो अपने परिवारों की रीढ़ थीं। कटिहार एसपी ने मामले की जांच तेज कर दी है, लेकिन असल न्याय तब होगा जब इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार बस मालिक, चालक और उन सुरक्षाकर्मियों पर कार्रवाई होगी, जिन्होंने नशे में धुत इस यमदूत को अपनी आंखों के सामने से गुजरने दिया।

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