बिहार में सारण के स्कूल में बच्चों को मिड-डे-मील देने से पहले खाने की गुणवत्ता की कोई जांच नहीं की गई थी। 23 बच्चों की मौत के इस मामले में प्रमुख आरोपी स्कूल प्रिंसिपल अब भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है।
इस दुखद घटना के बाद जागी बिहार सरकार मिड-डे-मील की खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी करने जा रही है।
बुधवार को सरकार ने 22 बच्चों की मौत की पुष्टि की थी, लेकिन बाद में पता चला कि एक बच्चे को उसके परिवार ने प्रशासन को जानकारी देने से पहले ही दफना दिया था।
बच्चों के परिवारों ने अपने मासूमों को धरमसती गंदावन गांव के उसी प्राइमरी स्कूल के बाहर दफना दिया है, जिसमें वह पढ़ते थे।
सारण के डीएम अभिजीत सिन्हा ने बृहस्पतिवार को बताया कि 24 बच्चे और खाना बनाने वाली महिला मंजू देवी का पटना के अस्पताल में अभी इलाज चल रहा है।
आरोपी स्कूल प्रिंसिपल मीना देवी को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस उसकी और उसके पति की तलाश में छापेमारी कर रही है। राज्य के प्रधान सचिव अमरदीप सिन्हा ने कहा कि खाने में जहर मिलाया गया था। हालांकि फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट शुक्रवार को आएगी।
बिहार में मिड-डे-मील कार्यक्रम के निदेशक आर लक्ष्मणन ने कहा कि जांच की जा रही है कि खाने की गुणवत्ता को परखा गया था या नहीं। लेकिन यह शिक्षकों और खाना बनाने वाली महिला की जिम्मेदारी है कि खाने की गुणवत्ता सही रहे। उन्होंने माना कि बहुत से स्कूलों में बच्चे अब खाने के पैकेट लेने से डर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता की कड़ी जांच के लिए राज्य के सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं।