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नीतीश को गढ़, लालू को नाक बचाने की चुनौती

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बिहार की सात सीटों पर आज हो रहे मतदान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना गढ़ नालंदा बचाने की चुनौती है, तो पाटिलपुत्र में अपने चेले राम कृपाल यादव के मुकाबले अपनी बेटी मीसा भारती को जिताने के लिए लालू यादव की भी अग्निपरीक्षा है।
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वहीं मुंगेर में जद(यू) के राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और लोजपा नेता बाहुबली सूरजभान की पत्नी वीणा देवी के बीच कांटे का मुकाबला है।

जबकि पटना साहिब में बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा को सजातीय जद(यू) के डा. गोपाल प्रसाद और भोजपुरी अभिनेता कांग्रेस उम्मीदवार कुणाल सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है।

नीतीश की अपनी बिरादरी पर भरोसा

आरा में पूर्व गृह सचिव आरके सिंह सियासी भंवर में फंसे हैं तो जहानाबाद में जद(यू) उम्मीदवार आम्रपाली समूह के मालिक बिल्डर अनिल शर्मा को अपनी सियासी इमारत गढऩे में रात दिन एक करना पड़ रहा है और बक्सर में भाजपा के अश्वनी चौबे को स्थानीय पार्टी नेताओं का भितरघात झेलना पड़ रहा है।

नालंदा जिसे नीतीश कुमार का गढ़ माना जाता है, उस पर अपनी फतह सुनिश्चित करने के लिए नीतीश ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

अब अगर नीतीश की अपनी बिरादरी ने इस राजनीतिक महाभारत में अपने नेता का साथ दे दिया तो मुख्यमंत्री अपना गढ़ बचाने में कामयाब हो सकेंगे, वरना इस सीट से जद(यू) की शिकस्त का बड़ा राजनीतिक संदेश जाएगा।

2004 में नीतीश खुद यहां से चुनाव जीते थे

नालंदा सीट 1996 से नीतीश कुमार के ही दल के पास है। 2004 में नीतीश खुद यहां से चुनाव जीते थे। 2009 में जद(यू) के कौशलेंद्र कुमार जीते जो इस बार भी मैदान में हैं।

नालंदा ही वह क्षेत्र जहां नीतीश कुमार की कुर्मी बिरादरी की बहुतायात है। इसलिए 1952 से अब तक यहां से दस बार कुर्मी उम्मीदवार ही जीता है। जबकि तीन बार जार्ज फर्नांडीस चुने गए। तीन बार भाकपा के विजय कुमार यादव जीते।

नालंदा में कुर्मियों के बाद दूसरी ताकतवर बिरादरी यादवों की है जबकि सभी सवर्ण जातियों का नंबर तीसरा है। इनके अलावा मुस्लिम, पासवान, कुशवाहा, अति पिछड़े और महादलित मतदाता भी हैं।

लालू प्रसाद यादव ने की है कई सभाएं

जद(यू) के अलावा यहां भाजपा गठबंधन के लोजपा उम्मीदवार सत्यानंद शर्मा, और राजद समर्थित कांग्रेस के उम्मीदवार पूर्व डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा हैं।

आम आदमी पार्टी ने भी प्रणव प्रकाश को मैदान में उतारा है जो कुर्मी बिरादरी से हैं। इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए नीतीश कुमार ने खुद भी कई सभाएं की और अपने कई बड़े नेताओं को भी चुनाव प्रचार में लगा दिया।

वहीं भाजपा गठबंधन के नेताओं रामविलास पासवान, राजीव प्रताप रूडी, नवज्योत सिंह सिद्धू, रविशंकर प्रसाद,उपेंद्र कुशवाहा, सुशील मोदी और राजद-कांग्रेस की ओर से लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार से यह सीट छीनने के लिए भी कई सभाएं की हैं।

मीसा भारती के खिलाफ राम कृपाल यादव

पाटिलीपुत्र लोकसभा सीट पर लालू यादव की बेटी मीसा भारती अपने पहले सियासी युद्ध में अपने पिता के शार्गिद रहे और अब भाजपा उम्मीदवार राम कृपाल यादव और कभी अपने पिता के खास सलाहकार (गुरु) माने जाने वाले जद(यू) उम्मीदवार रंजन प्रसाद यादव से लोहा ले रही हैं।

बेटी, पार्टी और परिवार की नाक बचाए रखने के लिए लालू प्रसाद यादव ने इस यादव मुस्लिम बहुल क्षेत्र में पूरी ताकत झोंक दी है।

भूमिहारों की रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया के पुत्र इंदुभूषण मुखिया का निर्दलीय मैदान में डटा रहना मीसा के लिए मुफीद साबित हो सकता है। लेकिन मुकाबला कड़ा है।

बिहारी बाबू को गली गली घूमना पड़ा

पटना साहिब में करीब साढ़े सात लाख कायस्थ मतदाताओं और मोदी लहर के भरोसे अपनी जीत को लेकर बेहद आश्वस्त बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा को अब वोट मांगने के लिए चुनाव के आखिरी दौर में गली गली घूमना पड़ा।

मौजूदा सांसद से नाराजगी और जद(यू) उम्मीदवार डा. गोपाल प्रसाद द्वारा कायस्थ वोटों में सेंधमारी ने भाजपा की नींद उड़ा दी है।

उधर अभी तक सिर्फ कुणाल लिखने वाले भोजपुरी सुपर स्टार कांग्रेस उम्मीदवार बनने के बाद कुणाल सिंह यादव हो गए। राजद के समर्थन से इस क्षेत्र के यादव और मुसलमानों का समर्थन उन्हें मुकाबले में खड़ा कर रहा है। हालांकि आम आदमी पार्टी की परवीन अमानुल्लाह भी खासी मेहनत कर रही हैं।

आरके सिंह भी त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे

आरा में भाजपा उम्मीदवार पूर्व गृह सचिव आरके सिंह जद(यू) की मीना सिंह और राजद के भगवान सिंह कुशवाहा के साथ त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हैं।

हालांकि भाकपा माले के राजू यादव भी मैदान में हैं, जिससे राजद उम्मीदवार के यादव वोटों में सेंधमारी हो सकती है तो वहीं आरके सिंह और मीना सिंह के बीच राजपूत वोटों का विभाजन भी हो सकता है।

मुंगेर में बाहुबली सूरजभान की पत्नी वीणा देवी लोजपा के टिकट पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार हैं, जिनका मुकाबला मौजूदा सांसद जद(यू) के दिग्गज राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह से है।

अश्वनी चौबे को सता रहा भितरघात ‌का डर

दोनों ही भूमिहार हैं और दबदबे में एक दूसरे से बढ़कर हैं। राजद-कांग्रेस गठबंधन के प्रगति मेहता भी मैदान में हैं, लेकिन कांटे का मुकाबला ललन और वीणा के बीच है। मुस्लिम मतों का झुकाव जद(यू) की तरफ दिखाई देता है।

बक्सर में वरिष्ठ भाजपा नेता लालमुनि चौबे का टिकट काटकर मैदान में उतारे गए अश्वनी चौबे को स्थानीय भाजपा नेताओं के भितरघात से खतरा दिखाई दे रहा है।

उनका मुकाबला राजद के ताकतवर नेता जगदानंद सिंह और जद(यू) के श्यामलाल कुशवाहा से है। जहां लालमुनि और उनके समर्थकों का कोप अश्वनी चौबे की राह का रोड़ा बन रहा है।
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यादव-मुस्लिम समीकरण के भरोसे उम्‍मीदवार

बसपा उम्मीदवार ददन सिंह यादव के मैदान में होने से जगदानंद के राजद समर्थक यादव वोटों में विभाजन का खतरा है। जबकि मुसलमानों का झुकाव राजद और जदयू दोनों तरफ है।

जहानाबाद में राजद के ताकतवर सुरेंद्र प्रसाद, भाजपा समर्थित राष्ट्रीय लोकतांत्रिक समाज पार्टी के डा.अरुण कुमार और जद(यू) के अनिल शर्मा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है।

अनिल शर्मा भूमिहार हैं और रियल इस्टेट ग्रुप आम्रपाली के मालिक हैं। उन्हें चुनाव जिताने के लिए क्षेत्र के कद्दावर भूमिहार जद(यू) नेता जगदीश शर्मा पूरी ताकत लगाए हुए हैं। जबकि राजद उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद के साथ यादव-मुस्लिम समीकरण एकजुट दिखाई दे रहा है।
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