वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बाद अब योजना आयोग ने भी आगे बढ़कर बिहार के प्रति अपनी दरियादिली दिखाई है।
बिहार के प्रति उमड़ रहे केंद्र के इस अथाह प्रेम को राजनीतिक गलियारों में आगामी लोकसभा चुनावों के लिए नीतीश पर डोरे डालने के नजरिए से देखा जा रहा है।
बुधवार को योजना आयोग ने बिहार के 34,000 करोड़ रुपये की वार्षिक योजनाओं के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी, जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 34 फीसदी से अधिक है।
बिहार की जमकर तारीफ
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने बताया कि राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि काफी अच्छी रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में बिहार ने सबसे बेहतर बढ़ोतरी हासिल की है। विशेषकर चावल की खेती में राज्य ने उत्पादन का नया रिकॉर्ड कायम किया है।
अहलूवालिया के मुताबिक बिहार की अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है। 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान राज्य की जीडीपी 11.87 फीसदी रही है, जो कि सभी राज्यों की जीडीपी के मुकाबले अधिक है।
यही नहीं बीते सात वर्षों के दौरान राज्य में प्रति व्यक्ति आय भी दो गुनी हुई है। वर्ष 2005-06 के दौरान बिहार में प्रति व्यक्ति आय 7749 रुपये थी जो कि वर्ष 2012-13 में बढ़कर 14,268 रुपये हो गई है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के राज्य की 34,000 करोड़ रुपये की योजना के प्रस्ताव को योजना आयोग ने मंजूर कर लिया है।
राज्य सरकार ने अपने बजट में भी इतनी ही राशि का प्रावधान रखा है।
वार्षिक योजना के लिये 46 फीसदी राशि राज्य सरकार अपने संसाधनों से उपलब्ध कराएगी जबकि करीब 27 प्रतिशत राशि बाजार से उधार लेकर जुटाई जाएगी।