बिहार में शराबबंदी की सफलता का पूरा श्रेय महिलाओं को जाता है। महिलाओं की ही मांग पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सामाजिक हित और बेहतर भविष्य के लिए शराबबंदी कानून लागू करने का साहसिक फैसला लिया था। ये बातें उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहीं।
'नशा एक गंभीर समस्या है'
मंत्री ने कहा कि शुरू में कई सवाल उठे, लेकिन नेक इरादों के कारण सभी कठिनाइयों से निजात मिल गई। इसका परिणाम है कि आज बिहार में शराबबंदी सफलतापूर्वक लागू है और इसके पीछे सबसे बड़ी ताकत महिलाओं का समर्थन है। उन्होंने कहा कि नशा एक गंभीर समस्या है, जो व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। यह न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करती है, बल्कि परिवार, समाज और पूरे राज्य को नुकसान पहुंचाती है। मंत्री ने बताया कि शराबबंदी से पहले इस विभाग से राज्य को लगभग 6-7 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व मिलता था।
शराबबंदी के बाद परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार
नशा मुक्ति से युवाओं को मिल रही सही दिशा: सचिव
विभागीय सचिव अजय यादव ने कहा कि बिहार नशा मुक्ति के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य है। पुलिस बल, मोटर बोट, स्निफर डॉग, ब्रेथ एनालाइजर और आधुनिक तकनीक के माध्यम से कानून का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि देश की 47 प्रतिशत आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा 57 प्रतिशत है। नशा मुक्त बिहार न सिर्फ युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा दे रहा है, बल्कि महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान भी प्रदान कर रहा है।
कार्यक्रम में सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत जीविका दीदियों को 50 करोड़ 63 लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया। अब तक इस योजना से 2 लाख 1 हजार 218 महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं।
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किलकारी बाल गृह के बच्चों ने नशा मुक्ति पर गीत प्रस्तुत किया, जबकि पटना कला एवं शिल्प महाविद्यालय के छात्रों द्वारा शराब के दुष्प्रभावों पर आधारित चित्रकला और मूर्तिकला प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम में विभाग के कई वरीय अधिकारी, जीविका दीदियां और पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।