राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG 2026) के नतीजों में बिहार के बेटे ने कमाल कर दिया है। पूरे देश में चौथा स्थान लाकर बिहार का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया। हम बात कर रहे हैं नवादा के वारिसलीगंज निवासी 18 वर्षीय आयुष भालोटिया की। आयुष ने ऑल इंडिया रैंक चार हासिल कर राज्य का नाम रोशन किया है। 720 में से 710 अंक प्राप्त करने वाले आयुष अब मेडिकल शिक्षा की दिशा में अपने सपने को साकार करने के बेहद करीब हैं। उनकी सफलता से परिवार ही नहीं, पूरे इलाके में उत्साह का माहौल है। आयुष को बधाई देने वालों का तांता लगा है।
मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ नेता और मंत्री ने आयुष को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आयुष भालोटिया की उपलब्धि बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि यह सफलता कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आयुष चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं देकर राज्य और देश का गौरव बढ़ाएंगे।
आयुष के अभिभावकों ने कहा कि हमलोगों की आयुष की सफलता पर काफी खुशी हो रही है। वह बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहता था। आशुष बचपन से ही पढ़ने में अव्वल रहा है। दसवीं में 96.2 प्रतिशत और बारहवीं में 93.8 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान नीट की तैयारी पर केंद्रित कर दिया। बोर्ड की मजबूत तैयारी ने प्रतियोगी परीक्षा में भी काफी मदद की। आयुष ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता के सहयोग के साथ अपने बड़े भाई अर्पित भालोटिया को भी देते हैं। उनका कहना है कि बड़े भाई ने समय प्रबंधन, आत्मविश्वास और परीक्षा के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने को लेकर लगातार मार्गदर्शन किया।
हर परीक्षा के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण किया
आयुष ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अच्छे अंक आने वाले थे यह पता था लेकिन देश में चौथा स्थान प्राप्त होगा, यह नहीं सोचा था। आज काफी खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा में सफलता केवल लंबे समय तक पढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि पढ़े हुए विषय को बार-बार दोहराने और नियमित अभ्यास से मिलती है। उन्होंने तैयारी के दौरान लगातार मॉक टेस्ट दिए और हर परीक्षा के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण किया। जिन विषयों में कमजोरी महसूस हुई, उन पर विशेष ध्यान देकर सुधार किया। अपनी खामियों को दूर करने की कोशिश करें। दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचानें, नियमित अभ्यास करें और आत्मविश्वास बनाए रखें।
कैसे तैयारी की? क्या सबसे ज्यादा जरूरी है?
आयुष ने कहा कि नीट की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी सबसे भरोसेमंद स्रोत है। उन्होंने अलग-अलग पुस्तकों के बजाय NCERT की अवधारणाओं को गहराई से समझने और बार-बार दोहराने पर जोर दिया। उनका कहना है कि मजबूत बुनियाद ही बेहतर परिणाम की कुंजी होती है। पिछले दो वर्षों से कोचिंग संस्थान में नियमित कक्षाएं लेने के साथ आयुष रोजाना कई घंटे स्वाध्याय करते थे। उनके अनुसार पढ़ाई की अवधि से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उस समय का उपयोग कितनी गंभीरता और एकाग्रता से किया जाए। उन्होंने अपनी दिनचर्या में अनुशासन बनाए रखा और तय लक्ष्य के अनुसार तैयारी जारी रखी। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि आप खुद को पहचानें।
जल्दी सर