प्रयास (एनर्जी ग्रुप) और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन जैसे उपभोक्ता संगठनों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद टीओडी टैरिफ देश के 22 से अधिक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू कर दिया गया है। इन नियमों के तहत, 1 अप्रैल, 2024 तक या उससे पहले, 10 केवी से अधिक की अधिकतम मांग वाले वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए टाइम ऑफ डे (टीओडी) अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा एनटीपी के अनुसार, स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता 'पीक' (अधिकतम मांग) और 'ऑफ-पीक' (कम मांग) समय के दौरान अपनी मांग के प्रबंधन को बेहतर बनाकर लाभ उठा सकते हैं।
ऊर्जा विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को कम लागत में बिजली उपलब्ध कराना और बिजली खपत को संतुलित करना है। नई व्यवस्था के तहत सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि (ऑफ-पीक) में बिजली सस्ती मिलेगी, जबकि शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक (पीक अवधि) में दरें अधिक होगी। रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक सामान्य दर लागू रहेगी। खास बात यह है कि स्मार्ट मीटर वाले सभी उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञ बोले- हर महीने कितने रुपये की बचत हो सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उपभोक्ता अपने उपयोग का कुछ हिस्सा पीक समय से हटाकर ऑफ-पीक समय में कर दें, तो हर महीने लगभग 90 रुपये तक की बचत संभव है। इससे न केवल उपभोक्ताओं का खर्च घटेगा, बल्कि बिजली व्यवस्था पर दबाव भी कम होगा। उदाहरण स्वरूप शहरी घरेलू उपभोक्ता यदि प्रतिदिन मात्र 2 यूनिट बिजली शाम की पीक अवधि से हटाकर दिन की ऑफ-पीक अवधि में उपयोग करें तो प्रतिदिन ₹2.96 की बचत होती है, जो प्रतिमाह लगभग ₹89.00 बनती है। यह बचत बिना कुल खपत घटाए, केवल उपयोग का समय बदलने से संभव है। इस प्रकार सभी स्मार्ट प्री-पेड मीटर एवं 10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू उपभोक्ता का। रोजाना 10 घंटे के खपत पर सामान्य दर, आठ घंटे के खपत पर सामान्य दर का 80% एवं मात्र छ घंटे के खपत पर सामान्य दर से मात्र 10% की दर ही अधिक भुगतान करना होगा। अगर उपभोक्ता उपरोक्त समयानुसार योजनाबद्ध तरीके से खपत करते है तो उन्हें बिजली बिल में व्यापक बचत होगी।
जानिए TOD टैरिफ क्या है?
TOD टैरिफ एक ऐसी बिलिंग प्रणाली है जिसमें बिजली की दरें उपयोग के समय के अनुसार बदलती है। जो उपभोक्ता अपनी बिजली खपत को ऑफ-पीक अवधि यानी सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक (ऑफ-पीक अवधि) बिजली की दरें कम रहेंगी। क्योंकि इस समय सौर ऊर्जा का उत्पादन अधिक होता है। शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक (पीक अवधि) में बिजली की दरें अधिक होगी, क्योंकि इस समय बिजली की मांग सबसे अधिक होती है एवं विद्युत वितरण कम्पनियों को बाजार से महंगी दर पर बिजली खरीदनी पड़ती है, बिजली दर निर्धारण में महंगी बिजली खरीदने में लगे अधिक खर्च को भी सम्मलित किया जाता है, जिसका भार भी प्रति यूनिट दर में वृद्धि होने से उपभोक्ताओं को ही वहन करना पड़ता है। रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक सामान्य दरें लागू रहेंगी।
जानिए किस समय बिल कम आयेगा?
किन उपभोक्ताओं पर लागू?
कृषि क्षेत्र को छोड़कर सभी उपभोक्ता, जिनकी अनुबंधित मांग 10 केवी से अधिक है। सभी स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता पर लागू होगा। इधर, ऊर्जा विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करें एवं ज्यादा खपत वाले बिजली उपकरणों का उपयोग दिन के समय करें, ताकि वे कम दर का लाभ उठाकर अपने बिजली बिल में कमी ला सकें।