पटना जिले के मसौढ़ी उपकारा से वायरल हुए शराब पार्टी वीडियो मामले ने प्रशासन और जेल विभाग को सकते में डाल दिया है। जहानाबाद से सटे इस जेल में कैदियों द्वारा कथित रूप से शराब और गांजा पार्टी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जेल डीआईजी नवीन कुमार झा ने खुद मसौढ़ी जेल पहुंचकर मंगलवार देर शाम तक जांच की और स्थिति की पूरी पड़ताल की।
डीआईजी ने बताया कि पूरे मामले की सत्यता के साथ गहन जांच की जा रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दे दिए थे।
फेसबुक लाइव से हुआ भंडाफोड़
सूत्रों के अनुसार, जेल के गौतम खंड के वार्ड नंबर 2 में बंद कुछ कैदियों ने शराब पार्टी का वीडियो खुद बनाया और उसे फेसबुक पर लाइव कर दिया। इस वीडियो में कैदी शराब पीते और गांजा फूंकते स्पष्ट रूप से नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो को देखते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
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कई कैदियों पर प्राथमिकी, गहन पूछताछ जारी
जांच के दौरान उपकारा अधीक्षक के बयान पर छह कैदियों के खिलाफ मसौढ़ी थाना में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोप है कि इन बंदियों ने जेल के अंदर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर वीडियो बनाकर वायरल किया, जिससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था में बाधा उत्पन्न हुई और प्रशासन की छवि धूमिल हुई।
प्राथमिकी में जिन बंदियों को आरोपी बनाया गया है, उनमें दीपक कुमार उर्फ भोगी (तारेगनाडीह, मसौढ़ी थाना), मो. इमाम (मसौढ़ी), विपिन कुमार (कुमारू बीघा, कल्पा ओपी, जहानाबाद), गोलू कुमार उर्फ गोलू यादव (महराजगंज, नौबतपुर थाना), अजीत कुमार (बालापर, धनरूआ थाना) और बोतल कुमार उर्फ बब्लू (पीपरपाती, कादिरगंज थाना) शामिल हैं। इन सभी से पुलिस द्वारा गहन पूछताछ की जा रही है।
कैदियों ने दी अजीब सफाई
जेल प्रशासन की जांच के दौरान जिन कैदियों की पहचान वीडियो में हुई, उनसे लिखित बयान लिया गया है। सभी आरोपितों ने दावा किया कि यह वीडियो उन्होंने सिर्फ मजाक के तौर पर नाटकीय अंदाज में तैयार किया था ताकि जेल की लापरवाही को उजागर किया जा सके। हालांकि वीडियो में साफ तौर पर शराब और गांजा पीने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में धुएं के गुबार, चिलम और बोतलें भी साफ नजर आती हैं, जिससे इनकी बातों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डीएसपी व एसडीओ भी जांच में रहे शामिल
जांच के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी अभिषेक कुमार और डीएसपी नभ वैभव भी जेल पहुंचे और पूरे मामले की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल के साथ यह भी देखा कि आखिर जेल में मोबाइल फोन और मादक पदार्थ कैसे पहुंचे।
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संगीन अपराधों में पहले से आरोपी हैं बंदी
जानकारी के अनुसार, जिन कैदियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, वे पहले से गंभीर आपराधिक मामलों में जेल में बंद हैं। ऐसे में इस तरह की गतिविधि न केवल जेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह दर्शाती है कि जेल के भीतर की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से विफल हो चुकी है।
जेल उपाधीक्षक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आरोपी कैदियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में जेल के अंदर ऐसी किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधियों को रोका जा सके। फिलहाल जेल प्रशासन और पुलिस इस पूरे मामले की कड़ी निगरानी कर रहे हैं।