पीएमसीएच में अलग-अलग जिलों से बच्चों को लेकर आने वाले परिजन परेशान हैं। बुखार से पीड़ित बच्चों को लेकर परिवार वाले अस्पताल में इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन इलाज तो दूर बच्चों के लिए न ट्रॉली है और न ही एम्बुलेंस।
बिहार में स्वास्थ्य सेवा सुधारने को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहे कितने भी दावे क्यों न कर लें लेकिन मरीजों का इलाज करवाने आए परिजन खुद इसकी पोल खोलते नजर आ रहे हैं। बिहार के नामी अस्पतालों में से एक पीएमसीएच में अलग-अलग जिलों से बच्चों को लेकर आने वाले परिजन परेशान हैं। बुखार से पीड़ित बच्चों को लेकर परिवार वाले अस्पताल में इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं, लेकिन इलाज तो दूर बच्चों के लिए न ट्रॉली है और न ही एम्बुलेंस।
विज्ञापन
वैशाली के एक मरीज के परिजन भी यहां के व्यवस्था से असहाय दिखे। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि 10 साल के बेटे को 20 दिन पहले काफी तेज बुखार आ गया था। बुखार के कारण वह बेहोशी की हालत में चला गया था। इसके बाद पीएमसीएच में 15 दिन पहले इलाज के लिए लाया गया। डॉक्टरों ने जांच रिपोर्ट में चमकी बुखार बताया। बच्चा कोमा में चला गया है। डॉक्टरों ने कहा कि कोमा से बच्चा जल्दी भी बाहर आ सकता है और लंबा समय भी लग सकता है। अब डॉक्टर ने एक बार फिर जांच के लिए लिखा, लेकिन ट्रॉली तक की व्यवस्था नहीं हो रही है, जिससे वह बच्चे को लेकर जांच के लिए ले जाए।
वहीं सोनपुर के एक अन्य मरीज के परिजन ने आपबीती बताते हुए कहा कि उसका 4 माह का बच्चा एक महीने के बुखार से तड़प रहा है। उसे लगातार बुखार आ रहा है। पिछले नौ दिनों तक उसका बच्चा पीएमसीएच में भर्ती था। ठीक होने के बाद जब घर ले गया तो कुछ दिनों बाद फिर से बुखार आने लगा। वह परेशान होकर फिर पीएमसीएच आया। जहां उसने पांच दिनों से बच्चे को भर्ती कराया है। बच्चे को खांसी-बुखार के साथ-साथ सांस की शिकायत है। अब पीएमसीएच के डॉक्टरों का कहना है कि उसे चमकी बुखार है। परिजन का कहना है कि किस तरह से इलाज हो रहा है, जो बार-बार बच्चे को बुखार हो रहा है, उसे समझ नहीं आ रहा क्या करे।