बिहार के चर्चित सुपर कॉप और पूर्व आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे ने आज एक भावुक पोस्ट किया है। उन्होंने यह पोस्ट अपने समर्थकों के लिए नहीं बल्कि अपनी पत्नी के लिए किया है। निःस्वार्थ समर्पण, त्याग एवं जिद के आगे मैं नतमस्तक हूँ। नतमस्तक।
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क्या लिखा है सुपर कॉप और पूर्व आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे ने?
पूर्व आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे ने अपनी पत्नी के लिए एक भावुक पोस्ट किया है। उन्होंने उस पोस्ट के साथ अपनी पत्नी की तस्वीर को भी शेयर किया है। उनकी पत्नी का नाम है, गौरी। सोशल मीडिया पर शिवदीप लांडे ने अपनी बात की शुरुआत अपनी पत्नी को उनके नाम से संबोधित करते हुए किया है। उन्होंने लिखा है-
"गौरी,
जीवन में बहुत सी कठिनाइयाँ आईं, विपत्तियों ने घेरा और बहुत विपरीत परिस्थितियां भी मुझे कभी विचलित नही कर पायी - मैं सदैव अटल रहा। किन्तु तुम्हारे एक निर्णय... सिर्फ एक निर्णय ने मुझे झकझोर कर रख दिया। अपने पिता को नया जीवन देने के लिए जब तुमने अपनी किडनी दान करने का निर्णय/संकल्प लिया। तुम्हारा अपने पिता के प्रति निःस्वार्थ समर्पण, त्याग एवं जिद के आगे मैं नतमस्तक हूँ। नतमस्तक ।
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मैं बस मूक दर्शक बन तुम्हें निहारता रहा
पिछले तीन महीनों में...ऑपरेशन के लिए जरूरी दर्जनों मेडिकल टेस्ट, हज़ारों कागजों की भूलभुलैया, कानूनी जंजीरें, सब कुछ तुमने अकेले संभाला। मैं? बस मूक दर्शक बन तुम्हें निहारता रहा, और बस ये सोचता रहा कि भगवान बेटी को इंसान के जीवन में क्यों भेजता है? शायद आज इस प्रश्न का उत्तर मुझे मिल गया वह यह कि शायद माँ का साथ इंसान के जीवन में एक पड़ाव तक ही रहता है और पूरी उम्र उस माँ की कमी को ईश्वर एक बेटी के रूप में पूरा करता है। पूरी उम्र।
क्यों नहीं रुकते ये आँसू?
अपने पोस्ट के आखरी पैराग्राफ में शिवदीप लांडे की भावुकता काफी बढ़ गई। उन्होंने अपने आंसुओं को किसी तरह रोकते हुए आगे लिखा है कि, "आज मुंबई के उस आईसीयू में... किडनी ट्रांसप्लांट के बाद... जब मैं तुम्हारे पास बैठा तुम्हारे मासूम चेहरे को देख रहा हूँ तो आँखों से बहता पानी... रुकने का नाम ही नहीं लेता। क्यों? क्यों नहीं रुकते ये आँसू? आज समझ आया। रिश्तेदारों में भाई छोड़ दे, बेटा पीठ दिखा दे, बहन मुड़ जाए, यहाँ तक कि पत्नी भी... जीवन-मृत्यु के इस युद्धक्षेत्र में साथ छोड़ दें। लेकिन बेटी? वो निस्वार्थ खड़ी रहती है। अपना जीवन दाँव पर लगाकर भी। तुम्हारी आँखें बंद हैं, गौरी। लेकिन तुम्हारा प्यार तुम्हारा त्याग हर पिता को सिखाता है कि बेटी ईश्वर का दिया हुआ सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं।"