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Satta Ka Sangram: कल नालंदा पहुंचेगा चुनावी रथ, सात विधानसभा वाले जिले में जदयू का दबदबा; जानें सियासी इतिहास

Mon, 03 Nov 2025 03:03 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा

सार

Bihar Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार में आगामी 6 और 11 नवंबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है। प्रदेश के चुनावी माहौल का जायजा लेने और राजनीतिक दलों के नेताओं से उनके वोट मांगने के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' मंगलवार को नालंदा पहुंचेगा। यहां जनता के मुद्दे जानने के बाद नेताओं के जवाब को तोला जाएगा।

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सत्ता का संग्राम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कल चार नवंबर 2025 दिन मंगलवार की सुबह आठ बजे ‘चाय पर चर्चा’ आपके शहर नालंदा में होगी। अमर उजाला पर कार्यक्रम लाइव टेलीकास्ट होंगे। उसके बाद दोपहर 12 बजे युवाओं से चर्चा की जाएगी। फिर शाम 4 बजे से कार्यक्रम में सभी पार्टी के नेता/प्रत्याशियों, उनके प्रतिनिधि/समर्थकों और आम लोगों से सवाल-जवाब किए जाएंगे। ऐसे में आइये जानते हैं नालंदा का इतिहास।

बिहार की राजनीति में नालंदा जिले की अहमियत किसी से छिपी नहीं है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह गृह जिला न केवल प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की विरासत समेटे है, बल्कि आधुनिक बिहार की सत्ता की राजनीति का भी केंद्र बिंदु रहा है। जिले की सात विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में इस बार 22.33 लाख से अधिक मतदाता अपने भविष्य का फैसला करेंगे।
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जदयू का अभेद्य किला
2020 के विधानसभा चुनाव में नालंदा जिले ने एक बार फिर जनता दल (यूनाइटेड) के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित की थी। सात में से पांच सीटों पर जदयू का कब्जा रहा, जबकि भाजपा और राजद को एक-एक सीट से संतोष करना पड़ा। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले श्रवण कुमार और जितेंद्र कुमार जैसे दिग्गजों ने अपनी सीटें बचाए रखीं। हालांकि, इस्लामपुर में राजद के राकेश कुमार रौशन की जीत और हिलसा में महज 12 वोटों के अंतर से जदयू की जीत ने यह संकेत दे दिया था कि पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लग रही है।

हिलसा का नाटकीय मुकाबला
2020 का सबसे रोमांचक चुनावी मुकाबला हिलसा विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला था। JD(U) के कृष्णमुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया ने राजद के अत्री मुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव को महज 12 वोटों के ऐतिहासिक अंतर से हराया था। 61,848 वोट पाने वाले प्रेम मुखिया की यह जीत बिहार के सबसे करीबी चुनावी मुकाबलों में दर्ज हो गई। इस नतीजे ने पुनर्मतगणना की मांग को भी जन्म दिया था।
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राजनीतिक विरासत का खेल
नालंदा की राजनीति में पारिवारिक विरासत की गहरी छाप है। अस्थावां से JD(U) के जितेंद्र कुमार, जो 2005 से लगातार पांचवीं बार जीते हैं, के पिता अयोध्या प्रसाद भी इसी सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। राजगीर से JD(U) के कौशल किशोर के पिता सत्यदेव नारायण आर्य आठ बार विधायक रहे और हरियाणा के राज्यपाल का पद भी संभाल चुके हैं। इस्लामपुर में राजद की एकमात्र जीत दर्ज करने वाले राकेश कुमार रौशन के पिता कृष्णबल्लभ प्रसाद भी इस क्षेत्र का कई बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

पढे़ं: नीतीश कुमार का मन महागठबंधन के साथ, उधर है भाजपा का दवाब; पूर्व सीएम ने क्यों कही ऐसी बात

 बिहारशरीफ: भाजपा का एकमात्र गढ़
जिला मुख्यालय बिहारशरीफ नालंदा की सबसे बड़ी विधानसभा सीट है, जहां 3.88 लाख से अधिक मतदाता हैं। यहां से भाजपा के डॉ. सुनील कुमार ने 2020 में राजद के सुनील कुमार को 15,102 वोटों से हराया था। चिकित्सक से राजनेता बने डॉ. सुनील कुमार ने अपना सफर JD(U) से शुरू किया था, लेकिन 2013 में भाजपा में शामिल होने के बाद से लगातार सफलता हासिल कर रहे हैं।

2020 के नतीजे

विधानसभा क्षेत्र प्रत्याशी का नाम पार्टी
अस्थावां जीतेंद्र कुमार जदयू
बिहार शरीफ डॉ. सुनील कुमार भाजपा
राजगीर कौशल किशोर जदयू
इस्लामपुर राकेश कुमार रौशन राजद
हिलसा कृष्णा मुरारी शरण जदयू
नालंदा श्रवण कुमार जदयू
हरनौत हरि नारायण सिंह जदयू

मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र हरनौत
हरनौत विधानसभा क्षेत्र, जो नीतीश कुमार का गृह क्षेत्र है, JD(U) के लिए वीआईपी सीट मानी जाती है। यहां से JD(U) के हरि नारायण सिंह 2010 से लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। 2020 में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी की ममता देवी को 27,241 वोटों के सबसे बड़े अंतर से हराया था।

36 हजार युवा पहली बार डालेंगे वोट
इस चुनाव की एक खास बात यह है कि 18 से 19 साल के 36,531 युवा मतदाता पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। ये युवा मतदाता चुनाव के समीकरण बदलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा, 20,510 दिव्यांग मतदाता भी मतदाता सूची में शामिल हैं। मतदाताओं में 11.77 लाख पुरुष और 10.56 लाख महिला मतदाता हैं। महिला मतदाताओं की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि इस बार महिला वोट बैंक निर्णायक साबित हो सकता है।

सात विधानसभा सीटों का विस्तृत विवरण

नालंदा जिले की सात विधानसभा सीटों पर होने वाले इस चुनाव में प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट पहचान है।

1- अस्थावां (विधानसभा क्षेत्र संख्या-171) में कुल 3,01,833 मतदाता हैं, जिनमें 1,59,726 पुरुष और 1,42,100 महिलाएं शामिल हैं। यह सीट ऐतिहासिक रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है और यहां किसानों के मुद्दे चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं।

2- बिहारशरीफ (विधानसभा क्षेत्र संख्या-172) नालंदा जिले की सबसे बड़ी विधानसभा सीट है, जहां 3,88,095 मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे। इनमें 2,02,407 पुरुष और 1,85,670 महिला मतदाता हैं। जिला मुख्यालय होने के कारण यह सीट राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

3- राजगीर (विधानसभा क्षेत्र संख्या-173) अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट नालंदा की सबसे छोटी सीट है, जहां 2,98,030 मतदाता हैं। पर्यटन स्थल होने के कारण यहां रोजगार और विकास के मुद्दे प्रमुख रहते हैं।

4- इस्लामपुर (विधानसभा क्षेत्र संख्या-174) में 3,00,911 मतदाता हैं। यह क्षेत्र सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है और यहां मिश्रित आबादी है।

5- हिलसा (विधानसभा क्षेत्र संख्या-175) में 3,03,198 मतदाता हैं। 2020 के चुनाव में यहां सबसे रोमांचक मुकाबला देखने को मिला था, जो महज 12 वोटों के अंतर से तय हुआ था।

6- नालंदा (विधानसभा क्षेत्र संख्या-176) में 3,23,961 मतदाता हैं, 

7- हरनौत (विधानसभा क्षेत्र संख्या-177) में 3,17,971 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

कृषि और पर्यटन का संगम
भौगोलिक और आर्थिक रूप से नालंदा जिला समृद्ध कृषि के लिए जाना जाता है। धान, आलू और प्याज की खेती यहां की मुख्य आर्थिक गतिविधि है। बिहारशरीफ जैसे शहरी केंद्र फुटवियर और वस्त्र निर्माण जैसे घरेलू उद्योगों का केंद्र हैं, जबकि राजगीर और पावापुरी जैसे पर्यटन स्थल जिले की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। राजगीर, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। मगध साम्राज्य की यह प्राचीन राजधानी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रही है।

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सत्ता का संग्राम कार्यक्रम

सुबह 8 बजे: काली चौराहा भैसासुर, बिहार शरीफ

दोपहर 12 बजे: आईएमए बिहार शरीफ

शाम 3 बजे: गायत्री मंदिर के पास नाला रोड, बिहार शरीफ

विशेष कवरेज को आप यहां देख सकेंगे
amarujala.com, अमर उजाला के यूट्यूब चैनल और फेसबुक चैनल पर आप 'सत्ता का संग्राम' से जुड़े कार्यक्रम लाइव देख सकेंगे। 'सता का संग्राम' से जुड़ा व्यापक जमीनी कवरेज आप अमर उजाला अखबार में भी पढ़ सकेंगे।

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