उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) का जदयू में विलय तय है और रविवार को इसका औपचारिक एलान हो सकता है। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहेंगे।
विलय के बाद कुशवाहा को नीतीश का राजनीतिक कामकाज संभालने की जिम्मेदारी दी जाएगी। विलय से पूर्व कुशवाहा ने भी कहा है कि वह सरकार में शामिल होने की जगह संगठन में जिम्मेदारी लेंगे। दरअसल, विधानसभा चुनाव में लगे झटके बाद नीतीश पार्टी को मजबूत करने की मुहिम में जुटे हैं।
रालोसपा के महासचिव माधव आनंद ने बताया, पार्टी ने 13-14 मार्च को दो दिवसीय बैठक बुलाई है, जिसमें कार्यकर्ताओं से विलय की मंजूरी ली जाएगी। तब तक इंतजार करें, आपको पार्टी के फैसले का पता चल जाएगा।
वहीं, जदयू के वरिष्ठ नेता ने कहा, रालोसपा के साथ विलय की योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है और पटना में 14 मार्च को इसकी घोषणा हो सकती है। हमें विश्वास है कि विलय के बाद जदयू और मजबूत होगी।
रालोसपा को पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में करारी हार झेलनी पड़ी थी। 243 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। रालोसपा ने असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआईएमआईएम और बसपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था और उपेंद्र कुशवाहा ने खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था।
विलय से पूर्व झटका, प्रदेश अध्यक्ष समेत 35 राजद में शामिल
विलय से पूर्व कुशवाहा को झटका लगा है। कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कुशवाहा समेत 35 नेताओं ने राजद का दामन थाम लिया है। रालोसपा का जदयू में विलय होने से पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का दावा है कि उपेंद्र कुशवाहा को छोड़कर रालोसपा का विलय राजद में हो गया है।
जदयू में रालोसपा के विलय का सपना संजोए उपेंद्र कुशवाहा को तेजस्वी यादव ने बड़ा झटका दिया है। शुक्रवार को पार्टी के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कुशवाहा, प्रधान महासचिव निर्मल कुशवाहा, सहित 35 पदाधिकारियों ने राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मौजूदगी में राजद की सदस्यता ग्रहण की है।