राजधानी पटना के बाढ़ स्थित उमानाथ मंदिर के सामने गंगा नदी में नाव पलटने से पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग अब भी लापता हैं। उनकी तलाश में एनडीआरएफ की टीम जुटी हुई है। हादसे में लीला देवी (30), श्रवण महतो (36), काशी कुमार (14), कंचन उर्फ कबूतरी (16) और नीलम देवी (40) के शव बरामद कर लिए गए हैं। वहीं राहुल कुमार और ममता देवी अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
नाव पलटते ही गंगा की तेज धारा में बहने लगे लोग
नाव हादसे में पांच लोगों की जान बचाने वाले टुनटुन ने बताया कि जब नाव तेज धार में फंस गई थी, तब वह लगातार नाव से पानी बाहर फेंक रहे थे। तेज हवा के बीच अचानक नाव पलट गई और उसमें सवार सभी 14 लोग गंगा की तेज धारा में बहने लगे।
पत्नी को बचाने का वादा अधूरा रह गया
टुनटुन ने बताया कि उनकी पत्नी भी गंगा की धारा में बहने लगी थी। उसने बेबसी से अपने पति की ओर देखा और खुद को बचाने की गुहार लगाई। पत्नी ने कहा,'जल्दी आइए' इस पर टुनटुन ने जवाब दिया,'दो मिनट रुको, हम बचा लेंगे।' उस समय वह अपने बहनोई को बचाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने बहनोई की जान तो बचा ली, लेकिन दो मिनट की दूरी हमेशा की दूरी बन गई। जैसे ही वह पत्नी को बचाने के लिए आगे बढ़े, उनकी आंखों के सामने ही पत्नी गंगा में डूब गई।
दूसरों को बचाते-बचाते खो दिया अपना संसार
टुनटुन ने बताया कि वह जितना संभव हो सका, डूब रहे लोगों को बचाने में जुटे रहे। जो भी सामने आया, उसकी जान बचाने की कोशिश की। लेकिन दूसरों की जिंदगी बचाने के दौरान उन्होंने अपनी पत्नी को खो दिया। उनके परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है। बेटे की शादी पिछले महीने 6 तारीख को हुई थी।
नाविक की लापरवाही का आरोप
टुनटुन ने हादसे के लिए नाव चलाने वाले की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि वह लगातार नाविक से रास्ता बदलने के लिए कह रहे थे, लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी। पहली बार गंगा की तेज लहर आने पर किसी तरह नाव संभल गई, लेकिन दूसरी बार तेज लहर आने पर नाव पलट गई।
परिवार के कई लोगों की बचाई जान
टुनटुन ने बताया कि उनके बड़े भाई ने भी परिवार के चार लोगों की जान बचाई। वहीं नाविक लोगों को डूबता छोड़ मौके से भाग गया। डूब रहे लोगों में उनकी मां, बहनोई, बहन और भौजाई शामिल थे, जिन्हें उन्होंने बचा लिया, लेकिन पत्नी को नहीं बचा सके।
खेती और परिवार में पत्नी देती थी साथ
टुनटुन ने बताया कि उनकी पत्नी श्रृंगार की दुकान चलाती थी। वह खुद दियारा क्षेत्र में खेती करते हैं, जिसमें उनकी पत्नी भी पूरा सहयोग करती थी। हादसे के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है।
रोजी-रोटी के लिए गंगा पार करते हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के लोग रोज अपनी जान जोखिम में डालकर गंगा पार दियारा इलाके में खेती करने जाते हैं। प्रतिदिन सुबह 4 बजे लोग नाव के जरिए गंगा पार करते हैं। हादसे वाली नाव पर आमतौर पर 18 से 20 लोग सफर करते थे, लेकिन तेज हवा के कारण नाव पलट गई।
गांव में 50 वर्षों बाद इतना बड़ा हादसा
ग्रामीणों के अनुसार, हादसे में डूबने वाले ज्यादातर लोगों को तैरना नहीं आता था। डूबने वालों में पिता-पुत्र भी शामिल थे, जिन्हें तैरना नहीं आता था। गांव वालों का कहना है कि पिछले 50 वर्षों में इस तरह का बड़ा हादसा नहीं हुआ।
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बिना खाद और रसायन के होती है खेती
ग्रामीणों ने बताया कि दियारा में उगाई जाने वाली सब्जियों में खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया जाता। खेती पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से की जाती है और बिना रसायन के भी अच्छी पैदावार होती है।