पटना कॉलेज काउंसलर सुन्दरम कुमार भारती।
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बिहार विधानसभा और विधान परिषद् के सदस्यों में कई अब भी ऐसे हैं, जो पटना विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से निकले हैं। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी। चर्चित दिग्गजों का जिक्र करें तो दिवंगत सुशील कुमार मोदी और भूतपूर्व रेल मंत्री व राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का नाम पटना विवि छात्र राजनीति से ही निकला था। लालू जब राजनीति की मुख्य धारा में आए तो पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव ठप ही हो गया। नतीजा, कोई बड़ा नाम लंबे समय तक नहीं निकला। इस सदी में पहली बार चुनाव 2012 में हुआ था। 2016, 2018, 2019, 2022 और 2025 के बाद यह सदी का सातवां पुसु चुनाव है। 28 फरवरी को दिन में मतदान हुआ और देर रात तक फैसला आएगा। ऐसे में यह जानना रोचक है कि चुनाव का असर क्या पड़ेगा?
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नई पीढ़ी से अब तक सिर्फ आशीष ही मुख्य धारा में रहे
पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव को लंबे समय तक रोके रखा गया। ऐसी परिस्थिति ही नहीं बनने दी जा रही थी कि चुनाव हो सके। मांग उठती थी और रह जाती थी। 2005 में जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बने तो चर्चा फिर शुरू हुई, लेकिन माहौल बनने में पूरे सात साल लगे। 2012 में पटना विवि छात्र संघ का चुनाव हुआ तो भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् ने मोर्चा संभाला। तत्कालीन भाजपा विधायक अरुण कुमार सिन्हा के बेटे आशीष सिन्हा ने जलवा दिखाया। अध्यक्ष बने। किस्मत ने आगे भी साथ दिया। फिर अगला चुनाव 2016 में जाकर हुआ। इस दौरान आशीष ने जीत के पहले वाली पकड़ को और मजबूत बनाए रखा। यही कारण है कि 2016 में जब चुनाव भी हुआ और अभाविप के दिव्यांशु भारद्वाज निर्दलीय भी उतरे तो आशीष ने उन्हें जिताने में पूरी ताकत झोंक दी। दिव्यांशु जीते भी। आशीष आज के चुनाव में भी अभाविप प्रत्याशी के लिए मतदाताओं को जागरूक करने के लिए लगे थे, क्योंकि वह अब भाजपा युवा मोर्चा में लगातार सक्रिय हैं।
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जदयू ने दो बार जीत दर्ज की, पप्पू की पार्टी भी जीती थी
पटना विवि छात्र संघ चुनाव के मैदान में बिहार में सत्तारूढ़ दल भी आपस में लड़ते-भिड़ते रहे हैं। 2018 में छात्र जनता दल यूनाईटेड के मोहित प्रकाश अध्यक्ष बने थे। इसके बाद फिर सत्ताधारी दलों की लड़ाई में बाजी पप्पू यादव की तत्कालीन पार्टी- जन अधिकार पार्टी ने मार ली थी। जाप के मनीष यादव ने 2019 का चुनाव जीता था। यह खुशी फिर लंबे समय चली, क्योंकि बीच में कोरोना आ गया। इसके बाद फिर 2022 में छात्र जदयू के आनंद मोहन ने सत्ताधारी दल की वापसी कराई। इसके बाद, सत्ताधारी भाजपा के छात्र संगठन अभाविप ने 2025 में वापसी की, जब मैथिली को जीत मिली। अब 2026 का मतदान हो चुका है। सत्ताधारी दलों के अंदर गतिरोध और अभाविप में टूट के कारण कांग्रेस की छात्र इकाई- NSUI सीधे मुकाबले में है।