पीएचईडी मंत्री नीरज कुमार बबलू
- फोटो : अमर उजाला
राजस्थान सरकार द्वारा धर्मांतरण के खिलाफ विधेयक पेश करने की तैयारी के बीच, बिहार सरकार के पीएचईडी मंत्री नीरज कुमार बबलू ने राज्य में भी इस तरह के कानून की आवश्यकता जताई है। उन्होंने कहा कि बिहार में धर्मांतरण के मामले में खासकर गरीब और महादलित वर्ग को प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराया जाता है। इसके खिलाफ सख्त कानून बनाना जरूरी है।
‘धर्मांतरण से समाज में तनाव बढ़ता है’
पटना में नीरज कुमार बबलू ने अपने बयान में कहा कि बिहार के कुछ हिस्सों में प्रलोभन, बहलाकर या बहका कर धर्मांतरण की घटनाएं सामने आती हैं। इससे सामाजिक विवाद और तनाव की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जब धर्मांतरण के बाद दूसरे धर्म में विवाह किए जाते हैं, तो इससे धार्मिक उन्माद और सामाजिक लड़ाई झगड़े होते हैं।
सरकारी लाभ पर रोक लगाने की मांग
मंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग धर्मांतरण के लिए काम करते हैं, उन्हें मिलने वाली सरकारी सुविधाओं पर रोक लगानी चाहिए। उनके अनुसार, जब तक सरकारी लाभ पर रोक नहीं लगेगी, धर्मांतरण का खेल जारी रहेगा। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून की जरूरत है, ताकि इससे होने वाले विवादों पर काबू पाया जा सके और समाज में वैमनस्यता को कम किया जा सके।
‘कानून बनाकर धर्मांतरण की घटनाओं पर लगे विराम’
नीरज कुमार बबलू ने कहा कि धर्मांतरण के कारण कानून व्यवस्था बिगड़ती है और विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ता है। उनका मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए धर्मांतरण विरोधी कानून बनाना जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से शादी-ब्याह और धर्म परिवर्तन के बाद होने वाली सामाजिक हिंसा की तरफ भी ध्यान आकर्षित किया।
राजस्थान सरकार का कदम और बिहार का रुख
राजस्थान सरकार की ओर से धर्मांतरण के खिलाफ विधेयक लाए जाने की खबर के बाद, बिहार के मंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी राय दी। उनका कहना था कि इस विधेयक की तर्ज पर बिहार में भी इसी प्रकार के कानूनी प्रावधान लागू किए जाने चाहिए।