पार्षद विकास सिंह के साथ ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
कैमूर जिले के भभुआ प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में हर घर पानी पहुंचाने की योजना के तहत पीएचईडी विभाग द्वारा हैंडपंप या चापाकल के लिए 90 से 120 और 150 फीट तक बोरिंग करके पेयजल उपलब्ध कराया जाना था। पीएचईडी विभाग के अभियंताओं ने इसके लिए 60 से 70 फीट पर पाइप डालकर हैंडपंप चालू करवा दिया और 100 फीट से 150 तक बोरिंग दिखाकर बिल भी पास करवा लिया। अब अभियंताओं के इस भ्रष्टाचार की बलि चढ़े सभी हैंडपंप और चापाकल भीषण गर्मी में ठप पड़ गए हैं।
बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार पर काबू पाने के साथ ही निश्चित योजना के अंतर्गत सभी घरों में पानी पहुंचाने के लक्ष्य के लिए नल जल योजना लागू की थी लेकिन यह योजना ही भ्रष्टाचार की बलि चढ़ गई। जिले के भभुआ प्रखंड की ग्राम पंचायत बहुअन के झगईडिहरा गांव एवं ग्राम पंचायत महुआरी के मचहलपुर गांव में सैकड़ों अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग पानी के अभाव में दर-दर भटक रहे हैं।
इस भरी गर्मी में प्रदेश में अंतिम दौर का मतदान होना है लेकिन आजादी के 75 वर्षों बाद भी भ्रष्टाचार पर काबू नहीं पाया जा सका है। सही मायनों में देखा जाए तो सरकार की हैंडपंप-चापाकल नल-जल योजना मात्र शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। कैमूर जिला पार्षद विकास कुमार सिंह उर्फ लल्लू पटेल ने जब मचहलपुर, झगईडिहरा सहित कई गांवों का दौरा किया तो पता चला कि सैकड़ों परिवार पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने कैमूर जिला पार्षद विकास सिंह से मामले में गुहार लगाई कि जल्द से जल्द पानी की इस समस्या को दूर किया जाए। पार्षद ने इस मामले में ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस समस्या का निस्तारण के लिए बात करेंगे, नहीं तो लोकसभा चुनाव के बाद इसे लेकर जनआंदोलन किया जाएगा।