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Bihar: नवजात के गायब होने और संभावित तस्करी मामले में हाईकोर्ट सख्त, नालंदा के अस्पताल पर कार्रवाई के निर्देश

Thu, 13 Aug 2026 11:20 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा

सार

नालंदा के बिहार शरीफ स्थित नवजीवन शिशु अस्पताल से नवजात के गायब होने और संभावित तस्करी के मामले में पटना हाईकोर्ट ने पुलिस जांच में लापरवाही और अस्पताल के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर पर कड़ी नाराजगी जताई है।
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नालंदा के बिहार शरीफ स्थित नवजीवन शिशु अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नालंदा जिले के बिहार शरीफ स्थित ‘नवजीवन शिशु अस्पताल’ से नवजात शिशु के गायब होने और उसकी संभावित तस्करी के मामले में पटना हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। क्रिमिनल रिट क्षेत्राधिकार मामला संख्या 3338/2025 की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रमेश चंद मालवीय की खंडपीठ ने पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आई लापरवाही को गंभीरता से लिया। अदालत ने अस्पताल के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई करने और जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

डॉक्टर पर रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप प्रथम दृष्टया सही

सुनवाई के दौरान नालंदा के पुलिस अधीक्षक ने अदालत को बताया कि अस्पताल के प्रभारी डॉ. ब्रजेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। जांच और जब्त किए गए दस्तावेजों के आधार पर पता चला कि 26 मार्च 2023 को अस्पताल में 3.450 किलोग्राम वजन के एक जीवित बालक का जन्म हुआ था।

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जन्म के बाद नवजात को करीब 17 दिनों तक आईसीयू में रखा गया। इस दौरान उसके परिजनों को नवजात से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि डॉक्टर ने खुद प्रवेश रजिस्टर में ओवरराइटिंग की थी। रजिस्टर में ‘मेल’ यानी लड़का शब्द के आगे ‘फी’ अक्षर जोड़कर उसे ‘फीमेल’ यानी लड़की कर दिया गया था।

NICU में CCTV और सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं मिली

पुलिस की जांच में अस्पताल के एनआईसीयू की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर खामियां सामने आईं। जांच के दौरान पाया गया कि एनआईसीयू में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे और वहां कोई सुरक्षा गार्ड भी तैनात नहीं था। इसके अलावा अस्पताल के प्रवेश और निकास रजिस्टर भी सही तरीके से मेंटेन नहीं किए जा रहे थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने मामले की जांच और अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता जताई।

FSL रिपोर्ट में देरी पर कोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार

मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजने में हुई देरी और पुलिस की ओर से दी गई भ्रामक जानकारी पर भी हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। इसके बाद नालंदा के एसपी ने अदालत को बताया कि विवादित रजिस्टर को एफएसएल पटना के हस्तलेखन विंग को भेज दिया गया है। सुनवाई के दौरान हस्तलेखन विंग के निदेशक भी ऑनलाइन अदालत के समक्ष उपस्थित हुए और जांच पूरी कर 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया। एसपी ने यह भी बताया कि मामले की जांच में पहले लापरवाही बरतने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत अस्पताल पर होगी कार्रवाई

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के ‘पिंकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि मानव तस्करी जैसे मामलों में अस्पताल का लाइसेंस तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। पुलिस जांच में अस्पताल के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बावजूद अब तक लाइसेंस रद्द या निलंबित नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई।

डीएम को दो सप्ताह में कार्रवाई का आदेश

अदालत की फटकार के बाद नालंदा के एसपी ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेज दिया है। हाईकोर्ट ने नालंदा के जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि मामले को प्राथमिकता देते हुए अधिकतम दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुरूप उचित आदेश पारित करें। एसपी ने अदालत को यह भी भरोसा दिलाया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए एक गुप्त योजना के तहत जांच की जा रही है और वह इसकी रोजाना निगरानी करेंगे।

15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

पटना हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। अदालत ने नालंदा के एसपी को उस दिन अपनी कार्रवाई रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया है।

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