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Bihar News : पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट शराब पीने का अंतिम सबूत नहीं

Sat, 27 Jun 2026 09:34 PM IST
Krishan Ballabh Narayan न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar : बिहार पुलिस की मनमानी और गुंडई करने पर पटना उच्च न्यायालय ने पुलिस प्रशासन के गाल पर तमाचा मारा है। अदालत ने कहा कि बिना ब्लड और यूरिन टेस्ट के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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पटना हाई कोर्ट - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
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बिहार में अप्रैल 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के बीच पटना हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट की रिपोर्ट को किसी व्यक्ति द्वारा शराब सेवन का निर्णायक या अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, शराब पीने की सटीक पुष्टि के लिए आरोपी के रक्त  और यूरिन के नमूनों की जांच किया जाना अनिवार्य है।

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क्या है पूरा मामला?
 मामला 24 नवंबर, 2016 का है। बेगूसराय के गोशाला रोड निवासी, बीएमपी-6 के जवान मनोज ठाकुर को पुलिस ने कथित तौर पर नशे की हालत में हंगामा करते हुए पकड़ा था। उत्पाद विभाग ने ब्रेथ एनालाइजर से उसकी जांच की और शराब पीने की पुष्टि का दावा करते हुए प्राथमिकी दर्ज कर ली। निचली अदालत से राहत न मिलने के बाद मनोज ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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10 साल बाद मिली राहत
लगभग एक दशक पुराने इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट और अन्य उच्च न्यायालयों के पुराने आदेशों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि बिना ब्लड और यूरिन टेस्ट के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद पीड़ित जवान को 10 साल बाद आखिरकार न्याय और राहत मिली है।
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दूसरा मामला: सिर्फ शराब की महक के शक पर जब्त किया ट्रक, हाईकोर्ट ने लगाया ₹2.15 लाख का जुर्माना
 पटना हाईकोर्ट ने पुलिस की मनमानी और अतिशयोक्तिपूर्ण कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को पीड़ित ट्रक मालिक को मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला गोपालगंज के कुचायकोट थाने का है, जहाँ पुलिस ने सिर्फ इस संदेह में एक ट्रक को 10 महीने से जब्त कर रखा था कि उसके केबिन से शराब जैसी महक आ रही थी।
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केबिन से आ रही थी महक, नहीं मिली एक बूंद शराब
14 अगस्त, 2025 को कुचायकोट थाने के दारोगा सतेंद्र कुमार राय ने शराबबंदी कानून के तहत राजेश कुमार यादव के ट्रक को जब्त किया था। ताज्जुब की बात यह थी कि ट्रक से शराब की कोई बरामदगी नहीं हुई थी। पुलिस का तर्क था कि जब्ती से कुछ देर पहले जरूर शराब की तस्करी की गई होगी और उसे कहीं और उतार दिया गया होगा।
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हाईकोर्ट की खंडपीठ का सख्त रुख, जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जेब से वसूला जाएगा हर्जाना
जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस कुमार मनीष की खंडपीठ ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए राजेश कुमार यादव की रिट याचिका को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने राज्य सरकार से याचिकाकर्ता राजेश को ₹2 लाख का मुआवजा और अदालती खर्च के रूप में ₹15 हजार का हर्जाना देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि हर्जाने की यह राशि इस अवैध कार्रवाई के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के वेतन या संसाधनों से वसूली जाए। कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि कुचायकोट थाने में पड़े ट्रक की भौतिक जांच कराई जाए और उसमें हुई किसी भी प्रकार की टूट-फूट या यांत्रिक खराबी को पुलिस अपने खर्च पर ठीक करवाए।
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एसपी के सामने खुली दारोगा की पोल
सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में उस वक्त अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब कोर्ट ने दारोगा सतेंद्र राय से शराबबंदी कानून के प्रावधानों के बारे में पूछा। दारोगा ने अदालत में कबूल किया कि उसने इस कानून के प्रावधानों को कभी पढ़ा ही नहीं है। इस पर खंडपीठ ने गहरा आश्चर्य व्यक्त किया और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े गोपालगंज के एसपी से कहा कि जो दारोगा हलफनामे में 40 शराबबंदी मामलों की जांच करने का दावा कर रहा है, उसे कानून की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपालगंज के एसपी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

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