पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में रविवार को आइसा और आरवाईए की ओर से ‘GENZ Rising’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्र-युवाओं ने शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था, लोकतांत्रिक अधिकार, पुलिस दमन और आंदोलनों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कार्यक्रम को भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य, आइसा की राष्ट्रीय महासचिव नेहा बोरा समेत कई छात्र-युवा नेताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने केंद्र और बिहार की NDA सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए युवाओं से शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।
नेहा बोरा ने कहा- छात्रों पर हुए दमन का हिसाब लिया जाएगा
आइसा की राष्ट्रीय महासचिव नेहा बोरा ने बिहार के लोगों को जंतर-मंतर आंदोलन को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने भाजपा और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान बिहार में छात्रों और उनके परिवारों को दमन का सामना करना पड़ा। नेहा बोरा ने BPSC 70वीं परीक्षा में कथित धांधली और दरोगा भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े हर सवाल का हिसाब लिया जाएगा।
दीपंकर बोले- GENZ सिर्फ पीढ़ी नहीं, अन्याय के खिलाफ संघर्ष का नाम
भाकपा-माले महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि GENZ केवल एक पीढ़ी का नाम नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष और अपने अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और सम्मान को युवाओं के सामने सबसे बड़े सवालों में शामिल बताया। दीपंकर ने कहा कि बिहार में ‘स्कूल ठीक करो’ आंदोलन को व्यापक जनआंदोलन बनाने की जरूरत है। उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की बात करने वालों से सवाल किया कि ‘वन नेशन, वन एजुकेशन सिस्टम’ की बात क्यों नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि छात्र-युवा कॉमन स्कूल सिस्टम की लड़ाई लड़ेंगे।
‘उत्क्रमित नहीं, उत्पीड़ित विद्यालय बनाए गए’
दीपंकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि पिछले 20 वर्षों में बिहार की स्कूल शिक्षा व्यवस्था बदहाल हुई है। उन्होंने स्कूलों की आधारभूत संरचना, शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के नाम बदलने और उन्हें उत्क्रमित करने की घोषणाएं तो हुईं, लेकिन जमीनी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बिहार में कई उत्क्रमित विद्यालय आज भी उपेक्षा और बदहाली का सामना कर रहे हैं। विश्वविद्यालयों की स्थिति पर भी उन्होंने चिंता जताई।
दीपंकर ने कहा कि शिक्षा को केवल छात्र और शिक्षक का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे बिहार के भविष्य का सवाल बनाना होगा। बेहतर स्कूल, पर्याप्त शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान शिक्षा व्यवस्था के लिए व्यापक आंदोलन की जरूरत है। उन्होंने जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े मुकदमों का भी जिक्र किया। दीपंकर ने कहा कि अगर इन मुकदमों को वापस लिया जा सकता है तो किसान आंदोलन और शाहीन बाग आंदोलन से जुड़े मुकदमे भी वापस लिए जाने चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और लड़कियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के सवालों का जवाब दमन या उन्हें बदनाम करने की कोशिश के जरिए नहीं दिया जा सकता।
चार सत्रों में हुआ ‘GENZ Rising’ कार्यक्रम
‘GENZ Rising’ कार्यक्रम को चार सत्रों में आयोजित किया गया। पहले सत्र का विषय ‘जुल्म फिर जुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है’ रखा गया। इसमें आंदोलन और पुलिस दमन से जुड़े अनुभव साझा किए गए। विशाल, आरिफ, सबा और NEET परीक्षा से जुड़ी पीड़िता के पिता नवीन समेत अन्य लोगों ने अपनी बात रखी। दूसरे सत्र ‘आंदोलन की आवाज’ में विश्वविद्यालय अधिनियम, छात्र-युवा आंदोलन और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस सत्र को पालीगंज विधायक संदीप सौरभ, आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा, झारखंड आंदोलन की नेता हबीबा, जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े इरफान और अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।
संदीप सौरभ ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
पालीगंज विधायक संदीप सौरभ ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार से पूछा जाना चाहिए कि ऐसी कौन-सी पढ़ाई हो रही है, जिसमें छठी कक्षा के बच्चे दूसरी कक्षा की किताब तक नहीं पढ़ पा रहे हैं। उन्होंने शिक्षा बजट और स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। वहीं, आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत कुशवाहा ने कहा कि बिहार के छात्र-युवा लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को सुनने के बजाय लाठियां बरसा रही है।
युवाओं से सोशल मीडिया पर सही सूचना प्रसारित करने की अपील
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में व्यंग्यकार और प्रोफेसर डॉ. मेडुसा ने युवाओं से सोशल मीडिया पर सही सूचनाओं को प्रसारित करने और आंदोलनों को आगे बढ़ाने की अपील की। कार्यक्रम में छात्र-युवाओं के सामने शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था, लोकतांत्रिक अधिकार और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने तथा इन सवालों पर व्यापक एकजुटता बनाने का आह्वान किया गया।