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बिहार: पटना की महिला डॉक्टर पर कोरोना के पांच टीके लेने का आरोप, पैन से दो और आधार कार्ड से तीन सर्टिफिकेट जारी

Mon, 17 Jan 2022 11:06 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

बिहार के मधेपुरा में 11 बार कोरोना की वैक्सीन लगाने का दावा करके चर्चा में आए ब्रह्मदेव मंडल के बाद अब एक पटना की महिला डॉक्टर भी जांच की जद में आ गई हैं।
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पटना की सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी सिंह - फोटो : ANI
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विस्तार
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बिहार के मधेपुरा में जहां हाल में ही ब्रह्मदेव मंडल द्वारा कोरोना वैक्सीन की 11 डोज लेने की खबर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया था, वहीं अब पटना की सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी सिंह भी जांच के दायरे में आ गई हैं। दरअसल, कोविन पोर्टल पर पटना की सिविल सर्जन डॉ. विभा सिंह के नाम से पांच बार टीका लेने के दो सर्टिफिकेट जारी हुए हैं। इसके बाद से बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फुल गए हैं।

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इसकी जानकारी जब डीएम को लगी तो उन्होंने आरोपी महिला डॉक्टर से इसकी जानकारी ली। महिला डॉक्टर ने इस बात को सिरे से नकार दिया है कि उन्होंने कोरोना के पांच टीके लिए हैं। महिला डॉक्टर ने यह काम किसी शरारती तत्व का बताया है।

सिविल सर्जन डॉ. विभा कुमारी सिंह ने सोमवार को कहा, "मैंने एहतियाती खुराक सहित तीन खुराक ली हैं, 4-5 खुराक नहीं। मैंने आधार का उपयोग करके टीकाकरण के लिए खुद को पंजीकृत किया है, पैन कार्ड से नहीं। मामले की जांच की जाएगी।"
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पैन कार्ड से दो तो आधार कार्ड से तीन प्रमाणपत्र किए गए जारी
सोशल मीडिया पर पांच बार टीका लेने की खबर दिनभर वायरल होती रहीं। प्रमाणपत्र में आठ दिन के अंतराल पर दूसरी खुराक लेने की बात कही गई है। पैन कार्ड से निर्गत पहले प्रमाणपत्र में सिविल सर्जन को 28 जनवरी 2021 को पहला और 17 जून को दूसरा टीका लेने की बात सामने आई है। आधार कार्ड से निर्गत दूसरे प्रमाणपत्र में 6 फरवरी 2021 को पहला, 12 मार्च को दूसरा और 13 जनवरी 2022 को बूस्टर डोज दर्शाया गया है। 

डॉक्टर ने कहा मेरे खिलाफ की जा रही है साजिश
महिला सिविल सर्जन ने अपने ऊपर लगे आरोप पर सफाई देते हुए कहा कि कोविन पोर्टल की तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर किसी ने मेरे खिलाफ साजिश रचने की कोशिश की है। इसका झूठा सर्टिफिकेट भी कोविन पोर्टल पर अपलोड कर लिया गया है लेकिन कोविन पोर्टल पर वैक्सीन लेने के साथ पैन कार्ड की कॉपी अपलोड हो जाए, ऐसा होना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि इस खबर को फैलाने के पीछे कार्यालय के किसी कर्मी की मिलीभगत भी हो सकती है।

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