कारगिल पार्क में मनाया गया कारगिल दिवस
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नालंदा जिले के बिहारशरीफ स्थित शहीद-ए-कारगिल पार्क में रविवार को 27वां कारगिल विजय दिवस पूरे सम्मान, गर्व और राष्ट्रभक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। समारोह में वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए शहीद हुए नालंदा जिले के बिहार रेजीमेंट के जवान हरदेव प्रसाद की पत्नी मुन्नी देवी सहित सेना के अन्य जवानों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
शहीदों का बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा: श्रवण कुमार
समारोह को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि कारगिल विजय दिवस हमारे वीर जवानों के अद्वितीय साहस और बलिदान का प्रतीक है। देश की रक्षा करते हुए भारत माता का सम्मान बढ़ाने वाले शहीदों की कुर्बानी को राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने शहीदों को नमन करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से उन्हें धैर्य व शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
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'देश के लिए जान देना हर किसी के नसीब में नहीं होता'
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब शहीद हरदेव प्रसाद की पत्नी मुन्नी देवी ने कारगिल युद्ध की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके पति साढ़े 14 हजार फीट की दुर्गम ऊंचाई पर दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। युद्ध के दौरान उनके बाएं हाथ में गोली लगी थी। साथी जवान उन्हें कंधे पर लेकर सुरक्षित स्थान की ओर ला रहे थे, लेकिन रास्ते में उन्होंने वीरगति प्राप्त कर ली।
मुन्नी देवी ने गर्व के साथ कहा कि देश के लिए प्राण न्योछावर करना हर किसी के नसीब में नहीं होता। उन्हें अपने पति की शहादत पर गर्व है और यह गर्व पूरे देश का है, जो हर वर्ष कारगिल विजय दिवस के रूप में उनके बलिदान को याद करता है। इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में लोगों ने शहीद-ए-कारगिल पार्क पहुंचकर भारत माता के जयकारों के बीच वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।