फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar: नालंदा में विचित्र बच्चे का जन्म बना चर्चा का विषय, ग्रामीणों ने माना देवी का रूप, शुरू हुई पूजा

Mon, 07 Jul 2025 06:21 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा

सार

नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड के कोलावां गांव में सोमवार को एक नवजात बच्ची का जन्म दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति एनेनसेफली के साथ हुआ। सिर पूरी तरह विकसित न होने के कारण जन्म के मात्र 5 घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई।
 
विज्ञापन
विचित्र बच्चे ने लिया जन्म - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड अंतर्गत कोलावां गांव में सोमवार को एक नवजात बच्ची का जन्म दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति एनेनसेफली के साथ हुआ। जन्म के महज पांच घंटे बाद ही नवजात की मौत हो गई। इस दुर्लभ विकृति को लेकर गांव में अंधश्रद्धा का माहौल बन गया और लोगों ने बच्ची को ‘भगवान का रूप’ मानकर पूजा पाठ शुरू कर दिया।
विज्ञापन


सिर पूरी तरह विकसित नहीं था
कोलावां गांव निवासी प्रणय कुमार की पत्नी नेहा देवी को सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा हुई, लेकिन चिकित्सीय सुविधाओं की कमी के चलते उन्होंने घर पर ही बच्ची को जन्म दिया। यह उनकी दूसरी संतान थी। जन्म के समय बच्ची का सिर पूरी तरह विकसित नहीं था, जो एनेनसेफली नामक गंभीर न्यूरल ट्यूब दोष की पहचान है। इस असामान्य स्थिति को देखकर ग्रामीण स्तब्ध रह गए और कुछ ही देर में मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।

यह भी पढ़ें:  चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन ने खोला मोर्चा, तेजस्वी यादव बोले- विरोध में चक्का जाम करेंगे
विज्ञापन


चिकित्सा के अभाव में फैला अंधविश्वास
ग्रामीणों में चिकित्सा संबंधी जानकारी की कमी के चलते इस दुर्लभ शारीरिक विकृति को चमत्कार मान लिया गया। बच्ची को देवी का रूप मानकर कई लोगों ने पूजा शुरू कर दी।

15 दिन पहले मायके आई थी महिला
नवजात की मां नेहा देवी 15 दिन पहले ही अपने मायके कोलावां आई थीं। बच्ची के नाना दशरथ ने बताया कि जन्म के बाद बच्ची कुछ घंटे ही जीवित रही, जबकि मां की स्थिति फिलहाल सामान्य है। परंपरा के अनुसार, परिजनों ने नवजात के शव को गंगा में प्रवाहित कर दिया।
विज्ञापन


चिकित्सक ने दी जानकारी
इस मामले पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि एनेनसेफली एक गंभीर जन्म दोष है, जो भ्रूण के शुरुआती विकास के दौरान मस्तिष्क और खोपड़ी के पूर्ण रूप से विकसित न होने के कारण होता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति जानलेवा होती है और प्रभावित शिशु या तो मृत पैदा होते हैं या जन्म के तुरंत बाद दम तोड़ देते हैं।

 

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें