पटना जिले के बख्तियारपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्थिति देखकर स्थानीय विधायक अरुण कुमार साह भड़क गए। निरीक्षण के दौरान 42 में से केवल तीन मेडिकल स्टाफ ही ड्यूटी पर मौजूद मिले। वहीं, सीएचसी में मौजूद एकमात्र डॉक्टर भी रेस्ट रूम में मोबाइल पर रील देखते हुए पाए गए।
इस दौरान विधायक अरुण कुमार साह ने मरीजों और उनके परिजनों से अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। मरीजों के परिजनों ने बताया कि सीएचसी में एएनएम डिलीवरी के बाद "खुशीनामा" के नाम पर एक हजार रुपये तक वसूलती हैं। पैसा नहीं देने पर गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा के दौरान ही बेड पर छोड़ दिया जाता है।
एक परिजन ने आरोप लगाया कि इलाज में लापरवाही के कारण उनके नवजात की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यदि समय पर उनकी पत्नी का इलाज नहीं कराया जाता, तो उसकी भी जान जा सकती थी। उन्होंने कहा कि अब वे कभी इस सीएचसी में इलाज कराने नहीं आएंगे। मरीजों की शिकायतें सुनने के बाद विधायक ने स्वास्थ्यकर्मियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि वे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से मिलकर बख्तियारपुर में ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की मांग करेंगे।
'एएनएम जबरन रुपये वसूलती हैं'
'एएनएम एक हजार रुपये की मांग करती है'
परिजनों ने आरोप लगाया कि कई प्रसूताओं को पैसे नहीं देने पर डिस्चार्ज नहीं किया जाता। इतना ही नहीं, यदि मरीज पैसे नहीं देता तो उसकी फाइल में आशा कार्यकर्ता का नाम भी दर्ज नहीं किया जाता। एक अन्य आशा कार्यकर्ता रंजू कुमारी ने कहा कि जब तक लाभार्थी एएनएम को रुपये नहीं देती, तब तक डिलीवरी नहीं कराई जाती। यदि कोई मरीज 500 रुपये देता है, तो भी एएनएम एक हजार रुपये की मांग करती है। पैसे नहीं देने पर डिलीवरी में टालमटोल की जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि कोई आशा कार्यकर्ता शिकायत करती है, तो उसके मरीजों की देखभाल ठीक से नहीं की जाती। शिकायत करने पर एएनएम उन्हें धमकाती हैं और कहती हैं कि प्रभारी से बात कर ली जाएगी। रंजू कुमारी ने अस्पताल में मुफ्त डिलीवरी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में नवजातों की समुचित देखभाल नहीं होने के कारण लगभग प्रतिदिन किसी न किसी बच्चे की मौत हो जाती है या कुछ बच्चे विकलांग पैदा होते हैं। गंभीर मरीजों को समय रहते रेफर नहीं किया जाता और डिलीवरी मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं रहते।
कथित लापरवाही का आरोप
ये मांग की गई
निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल।