बख्तियारपुर पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में बख्तियारपुर में अवैध हथियारों के निर्माण की मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। यह बिहार पुलिस की ओर से अवैध हथियारों के गिरोह के खिलाफ की गई एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि बख्तियारपुर के टेकाबिगहा गांव के पास टाल क्षेत्र में धोबा पुल के मुहाने के समीप झाड़ियों में चार लोग अवैध हथियारों का निर्माण कर रहे हैं।
सूचना मिलते ही शुरू हुई छापेमारी
सूचना मिलते ही एसटीएफ की टीम अलर्ट हो गई और स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी शुरू कर दी। पुलिस टीम को देखते ही झाड़ियों में छिपे चारों लोग भागने लगे, लेकिन पुलिस ने खदेड़कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी विजय प्रसाद, धनंजय कुमार, सकलदीप प्रसाद और मिथिलेश बिंद नालंदा जिले के चिकसौरा गांव के निवासी बताए गए हैं। पुलिस के अनुसार, सकलदीप प्रसाद के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मौके से भारी मात्रा में हथियार बनाने का सामान बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से तीन बेस मशीन, दो निर्मित हथियार, तीन अर्धनिर्मित हथियार, एक खंडा भाठी (हथियार निर्माण में प्रयुक्त उपकरण), तीन कारतूस के खोखे, एक हैंड ड्रिल मशीन तथा कई बटखरे बरामद किए हैं। बरामद सामग्री से स्पष्ट हुआ कि यहां लंबे समय से हथियार निर्माण का काम संचालित किया जा रहा था।
डिमांड के अनुसार तैयार होते थे कट्टे
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि पांच लोगों ने मिलकर एक संगठित गिरोह बना रखा था। गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिराना था। सदस्य ग्राहकों से फोन पर ऑर्डर लेते थे और मांग के अनुसार कट्टों का निर्माण करते थे। गिरोह छापेमारी के डर से तैयार हथियारों का कहीं भंडारण नहीं करता था। कट्टा तैयार होते ही उसकी सप्लाई कर दी जाती थी, जिससे पुलिस के लिए उनके ठिकाने तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
रोज बनते थे चार से पांच कट्टे
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह रोजाना चार से पांच कट्टों का निर्माण करता था। हथियार तैयार होने के बाद उन्हें तुरंत ग्राहकों तक पहुंचा दिया जाता था। गिरोह का नेटवर्क नालंदा, धनरूआ, बख्तियारपुर, पटना समेत आसपास के कई इलाकों तक फैला हुआ था। एक कट्टे की कीमत 10 हजार से 15 हजार रुपये तक वसूली जाती थी।
ग्राहक की हैसियत के अनुसार तय होती थी कीमत
पुलिस के अनुसार, कट्टों की कीमत उनकी गुणवत्ता, लकड़ी या स्टील के बट तथा ग्राहक की आर्थिक स्थिति के आधार पर तय की जाती थी। इलाके में चिकसौरा के हथियार बनाने वाले मिस्त्री काफी चर्चित बताए जाते हैं। गिरफ्तार आरोपियों में पिता-पुत्र भी शामिल हैं, जो लंबे समय से इस अवैध कारोबार से जुड़े होने की आशंका है।
ये भी पढ़ें:
विधायक अनंत सिंह और गायक गुंजन सिंह गिरफ्तारी पर कोर्ट ने लगाई रोक, अब 5 जून पर टिकी सबकी नजर
सरगना की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस को अब इस अंतरजिला हथियार सप्लाई गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस गिरोह के नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई चेन और निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के स्रोतों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ से इस अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क से जुड़े कई और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।