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Bihar News: लोकसभा अध्यक्ष बोले- सशक्त विधायक की मजबूत लोकतंत्र का आधार होते हैं, इसकी गरिमा की रक्षा करें

Sat, 07 Feb 2026 05:44 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar Vidhan Sabha: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोक नीतियों और विधायी पहलों में महिलाओं और युवाओं की आकांक्षाओं को शामिल किया जाना चाहिए। महिलाओं और युवाओं को राष्ट्र के विकास में प्रमुख हितधारक बताते हुए उन्होंने कहा कि उपयुक्त विधानों के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान समावेशी विकास के लिए अनिवार्य है।
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार विधानसभा के स्थापना दिवस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधानमंडल के सदस्यों को संबोधित किया। “सशक्त विधायक, सशक्त लोकतंत्र” कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बिहार देश का इतिहास धरती है। आप सब लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ हैं। विधानसभा में सरकारी सेवा करने का अवसर मिला। बिहार राजनैतिक विरासत रही है। राजनीतिक नेतृत्व आज राजनितिक चिंतन है। उसमें देश में समय समय पर राजनीति परिवेश में परिवर्तन करने का रहा है। आप समाज का बदलाव कर सकते हैं। और कैसे मुख्यमंत्री रहकर सादगी जिंदगी जीता है। लोकतंत्र के मूल्यों को स्थापित कर सकते हैं। भगवान बुद्ध की धरती पर आज हम सब बैठे हैं। मुझे आशा है इस संवाद के कार्यक्रम को और भी सशक्त और मजबूत करेंगे। क्योंकि आज बिहार विधानसभा का स्थापना दिवस भी है। बिरला ने कहा कि सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि की मूलभूत जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विधायिका लोकतंत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्था है और इसकी गरिमा का सम्मान और रक्षा की जानी चाहिए।

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विधायी निगरानी से लोकतंत्र सुदृढ़ होता है
स्पीकर ओम बिरला ने विधायी कार्यवाहियों में व्यवधान और अमर्यादित आचरण की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रवृत्तियां लोकतांत्रिक निकायों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने सदस्यों से संवाद, तर्कसंगत वाद-विवाद और रचनात्मक चर्चा पर बल देने का आग्रह किया। उन्होंने आगे कहा कि आलोचना नीतियों और तथ्यों पर आधारित तथा जनकल्याण की भावना से प्रेरित होनी चाहिए। स्पीकर ने यह भी कहा कि संसदीय अनुशासन और रचनात्मक आलोचना पर आधारित सार्थक विधायी निगरानी से लोकतंत्र सुदृढ़ होता है। 

विधायक ही सशक्त लोकतंत्र का आधार होते हैं
उन्होंने कहा कि सशक्त विधायक ही सशक्त लोकतंत्र का आधार होते हैं। लोकतंत्र की मजबूती निर्वाचित प्रतिनिधियों की क्षमता, दक्षता और सत्यनिष्ठा से जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थानों की प्रभावशीलता केवल संवैधानिक प्रावधानों से नहीं, बल्कि इस बात से निर्धारित होती है कि जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किस प्रकार करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधायक को शक्ति जनता के विश्वास और भरोसे से प्राप्त होती है। सार्वजनिक मुद्दों को उठाकर, नागरिकों की चिंताओं को अभिव्यक्त कर तथा विधायी प्रक्रियाओं के माध्यम से उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य कर विधायक लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। बिरला ने यह भी कहा कि विधायकों का सशक्तीकरण लोगों की आवश्यकताओं को समझने, विधायी प्रक्रियाओं में सार्थक सहभागिता करने तथा नीति निर्माण में रचनात्मक योगदान देने की उनकी क्षमता में निहित है। यह सशक्तीकरण नैतिक आचरण, उत्तरदायित्व और जवाबदेही पर आधारित होता है। इन्हीं मूल्यों से  विधायक व्यापक जनहित में निरंतर कार्य करने में सक्षम बनते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब विधायक सशक्त, सुविज्ञ और उत्तरदायी होते हैं, तो लोकतांत्रिक संस्थानों की विश्वसनीयता और जनता का विश्वास मजबूत होता है। 
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ज्ञान से विधायकों की विश्वसनीयता बढ़ती है
ओम बिरला ने कहा कि संवैधानिक जागरूकता और प्रक्रियाओं के ज्ञान से विधायकों की विश्वसनीयता बढ़ती है। जो विधायक संसदीय प्रक्रियाओं से भली-भांति परिचित होता है, वह सार्थक हस्तक्षेप करने और शासन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने में अधिक सक्षम होता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक प्रभावी विधायक जनता की अपेक्षाओं और सरकारी नीतियों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु होता है। नियमों की जानकारी विधायकों को सदन की कार्यवाहियों में अधिक प्रभावी ढंग से भाग लेने तथा अपने विचारों को सुव्यवस्थित और तार्किक रूप से प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है। वाद-विवाद, चर्चाओं और समिति से जुड़े कार्यों में सार्थक भागीदारी के माध्यम से विधायक शासन की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास लोकतंत्र की सबसे मूल्यवान पूंजी है और सदन के भीतर और बाहर, दोनों जगह निष्ठापूर्ण और सिद्धांतपरक आचरण के माध्यम से इसकी रक्षा की जानी चाहिए।

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