बिहार में अब एलपीजी की समस्या नहीं है। हर घर तक अब आसानी से गैस पहुँच रहा है। बस लोगों को गैस का नंबर लगाना होगा। ऐसा इसलिए किया गया ताकि बाजार में कालाबाजारी न हो। आमलोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन के ऐसा करने से लोगों को पहले से अधिक राहत मिली है, लेकिन वहीं दूसरी तरफ एक वर्ग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र- छात्राओं का भी ऐसा भी है, जिसकी परेशानी कम होने के बजाय और अधिक बढ़ गई है। छात्रों की परेशानी से अन्य वर्ग भी परेशान होने लगे हैं।
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इस संबंध में जहानाबाद के शुभम कुमार का कहना है कि सरकार के दावे अपनी जगह है लेकिन सच्चाई यह है कि हम छात्रों के लिए गैस की रिफिलिंग करा लेना अब एक बड़ी समस्या की तरह हो गई है। उन्होंने बताया कि मुसल्लहपुर हाट और अशोक राजपथ से लेकर गांधी मैदान तक आप खूम लीजिए, आप गैस की रिफिलिंग नहीं करवा पाएंगे। अभी कुछ सप्ताह पहले तीन सौ रुपए किलो मैंने गैस रिफिलिंग करवाया था। अब एक किलो गैस जबतक चले, फिर आगे देखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मेरे कई साथी इसी समस्या से त्रस्त होकर घर चले गए।
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भागलपुर के राहुल बताते हैं कि गैस रिफिलिंग कराना एक बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने बताया कि 250- 350 रुपए प्रति किलो गैस मिलता है, वह भी बहुत मुश्किल से। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस बात का दावा करती है कि लोगों को परेशानी न हो इसके लिए 5 किलो के सिलिंडर की उपलब्धता कराई जा रही है, तो सरकार को बुलाईये और मैं दिखाऊंगा कि गैस का रिफिलिंग करवाना आसान है या मुश्किल। उन्होंने कहा कि मैंने कल भी बहुत ही मुश्किल से गैस का रिफिलिंग कराया। उन्होंने कहा कि हम विद्यार्थियों की जिंदगी तो संघर्षपूर्ण है ही, लेकिन इस एलपीजी ने जिंदगी की मुश्किलों को और अधिक बढ़ा दिया है। पटना में रेलवे की तैयारी कर रहे जहानाबाद के आलोक राज ने बताया कि मैं गांव का रहने वाला हूं और गांव में जलावन की दिक्कत नहीं होती है, इसलिए घर का गैस सिलिंडर यहां ले आया हूं, ताकि पढ़ाई बाधित नहीं हो सके।
वहीं कोचिंग संचालक सुधीर कुमार का कहना है कि छात्रों की परेशानियों को बहुत नजदीक से देखने का मौका मिलता है। मेरे पास बच्चे पढ़ने आते हैं, तो वेलोग सारी कहानी खुद ही सुनाते हैं। बहुत बच्चे एलपीजी की किल्लत से परेशान होकर घर चले गए। अब स्थिति ऐसी हो गई कि मेरे जिस क्लास में 70-75 बच्चे हुआ करते थे, अब बस 30-35 तक सिमट चुके हैं। वहीं कोचिंग के शिक्षक डॉ कृष्ण कुमार का कहना है कि बच्चों के साथ यह एक बड़ी समस्या है, जिसका समाधान सरकार को निकलना चाहिए।
हॉस्टल संचालक का कहना है कि मेरे हॉस्टल में लगभग 250 छात्र हैं, लेकिन वर्तमान में लगभग 100 विद्यार्थी बचे हुए हैं, अन्य सभी हॉस्टल छोड़कर घर चले गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ मेरे साथ ही नहीं हुआ है बल्कि अनगिनत हॉस्टल एलपीजी की भेंट चढ़ चुके हैं। लगातार हॉस्टल बंद हो रहे हैं, क्यों कि दूसरा कोई अन्य विकल्प नहीं है।